प्रसिद्ध फिल्मकार, लेखक और संगीतकार विशाल भारद्वाज तथा मशहूर गायिका रेखा भारद्वाज की उपस्थिति में ओशो की दुर्लभ संस्मरणात्मक पुस्तक Glimpses of a Golden Childhood का भव्य लोकार्पण 31 मई को मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में किया गया। इस अवसर ने साहित्य, अध्यात्म और कला जगत के लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
ओशो के साहित्य में इस पुस्तक को एक विशेष स्थान प्राप्त है। यह केवल एक संस्मरण नहीं है, बल्कि उस व्यक्तित्व की झलक भी प्रस्तुत करती है जिसने आगे चलकर दुनिया भर में लाखों लोगों को अपने विचारों और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रभावित किया। पुस्तक में ओशो ने अपने बचपन की अनेक घटनाओं, अनुभवों और स्मृतियों को साझा किया है, जो उनके व्यक्तित्व के निर्माण को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
Glimpses of a Golden Childhood पाठकों को उस बालक से परिचित कराती है जो निडर था, जिज्ञासु था और हर बात पर सवाल पूछने का साहस रखता था। ओशो अपने बचपन के अनुभवों को रोचक, मनोरंजक और आत्मीय शैली में प्रस्तुत करते हैं। कई प्रसंगों में उनकी शरारतें दिखाई देती हैं, तो कई जगह उनके भीतर मौजूद गहरे चिंतन और स्वतंत्र सोच की झलक भी देखने को मिलती है।
पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किसी पारंपरिक आत्मकथा की तरह नहीं लगती। इसमें घटनाओं का वर्णन केवल स्मृतियों के रूप में नहीं किया गया है, बल्कि हर अनुभव के पीछे छिपे जीवन-दर्शन और चेतना की यात्रा को भी समझाने का प्रयास किया गया है। यही कारण है कि यह पुस्तक साहित्य और अध्यात्म दोनों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए समान रूप से आकर्षक बन जाती है।
पुस्तक में कई दुर्लभ और अंतरंग तस्वीरें भी शामिल की गई हैं, जो पाठकों को ओशो के आरंभिक जीवन की झलक प्रदान करती हैं। इन तस्वीरों और संस्मरणों के माध्यम से पाठक उस दौर को महसूस कर सकते हैं जिसने आगे चलकर एक वैश्विक आध्यात्मिक व्यक्तित्व को आकार दिया।
पेंगुइन आनंदा द्वारा प्रकाशित यह हार्डकवर संस्करण 560 पृष्ठों का है। मार्च 2026 में प्रकाशित हुई यह पुस्तक वर्तमान में अमेज़न सहित विभिन्न प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं के माध्यम से उपलब्ध है। पुस्तक का सूचीबद्ध मूल्य ₹1499 रखा गया है।
ओशो के विचारों में हमेशा स्वतंत्रता, आत्म-अन्वेषण और व्यक्तिगत अनुभव को विशेष महत्व दिया गया है। इस पुस्तक में भी वही स्वर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वे अपने बारे में दुनिया द्वारा बनाई गई धारणाओं और परतों से परे जाकर स्वयं को समझने का प्रयास करते हैं। यही बात इस पुस्तक को एक साधारण संस्मरण से कहीं अधिक गहराई प्रदान करती है।
विशाल भारद्वाज और रेखा भारद्वाज की उपस्थिति में हुए इस लोकार्पण ने पुस्तक को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है। ओशो के जीवन, विचारों और उनकी आरंभिक चेतना को समझने की इच्छा रखने वाले पाठकों के लिए Glimpses of a Golden Childhood एक महत्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति साबित हो सकती है।
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