भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गोवा के मोरमुगाओ बंदरगाह में उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब सीमाओं पर शांति बनी रहे।
शांति चाहिए, तभी आर्थिक विकास
“युद्ध जैसे हालात में विकास संभव नहीं,” उन्होंने कहा। “शांति आती है शक्ति से—सुरक्षा, आर्थिक और राष्ट्रवाद की शक्ति से।”
राष्ट्रीय सुरक्षा व राष्ट्रवाद
उपराष्ट्रपति ने कहा, “राष्ट्रवाद के प्रति अडिग प्रतिबद्धता और निरंतर तैयारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं।”
ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी
धनखड़ ने ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की। 22 अप्रैल को पाकिस्तान के आतंकवादियों पर सटीक कार्रवाई ने दुनिया को संदेश भेजा। “सैनिकों द्वारा लाए ताबूत ही अनिवेद्य साक्ष्य हैं।”
समुद्री सुरक्षा और शिपबिल्डिंग
उन्होंने समुद्र में नियम-आधारित व्यवस्था पर जोर दिया। “हमारे कुल माल का 70% समुद्री मार्ग से जाता है। शिपबिल्डिंग में हमें अग्रणी बनना होगा।”
मोरमुगाओ बंदरगाह परियोजनाएँ
उपराष्ट्रपति ने तीन परियोजनाएं समर्पित कीं:
- 3 मेगावॉट सौर ऊर्जा संयंत्र
- दो हार्बर मोबाइल क्रेन
- कोयला हैंडलिंग कवर डोम
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री का जुनून विकास के लिए है। वे तेज और बड़े पैमाने पर निष्पादन में विश्वास करते हैं।”
विजिंजम पोर्ट में संघवाद की मिसाल
धनखड़ ने विजिंजम पोर्ट का उदाहरण दिया। “यह सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट मॉडल है,” उन्होंने बताया।
तटरक्षक बल की सराहना
उपराष्ट्रपति ने इंडियन कोस्ट गार्ड की बहादुरी और सेवा की प्रशंसा की। “आप हमारे समुद्री प्रहरी हैं और जीवन बचाते हैं।”भारत अब विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उपराष्ट्रपति के ये विचार हमें याद दिलाते हैं कि विकसित भारत 2047 के सपने में शांति, सुरक्षा और मजबूत समुद्री नीतियाँ ही आधार हैं।


