भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी रूप से विकसित आकाश-एनजी सतह-से-वायु मिसाइल प्रणाली के उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए गए हैं। यह सफलता इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली अब भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने के अंतिम चरण के करीब पहुंच चुकी है। उपयोगकर्ता परीक्षण किसी भी रक्षा प्रणाली के लिए सबसे निर्णायक माने जाते हैं, क्योंकि इनमें सेना स्वयं वास्तविक परिस्थितियों में प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को परखती है।

आकाश-एनजी, पहले से सेवा में मौजूद आकाश मिसाइल प्रणाली का उन्नत और नई पीढ़ी का रूप है। इसे आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। वर्तमान समय में हवाई खतरे केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बिना पायलट वाले हवाई यान, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्य और तेज़ी से दिशा बदलने वाले खतरे भी शामिल हैं। आकाश-एनजी को ऐसे सभी खतरों से निपटने में सक्षम बनाया गया है।

उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के दौरान इस मिसाइल प्रणाली को अलग-अलग परिस्थितियों में परखा गया। विभिन्न ऊंचाइयों और दूरियों पर उड़ते हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया गया। तेज़ गति से उड़ते और दिशा बदलते लक्ष्यों पर भी इसकी सटीकता प्रभावशाली रही। इन परीक्षणों ने यह साबित किया कि आकाश-एनजी केवल प्रयोगशाला में नहीं, बल्कि वास्तविक युद्ध जैसे हालात में भी भरोसेमंद प्रदर्शन करने में सक्षम है।

तकनीकी रूप से आकाश-एनजी को पहले की तुलना में कहीं अधिक उन्नत बनाया गया है। इसमें नई रॉकेट प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे अंतिम चरण में इसकी गति और मारक क्षमता बढ़ जाती है। यह मिसाइल लक्ष्य के पास पहुंचने के बाद स्वयं उसे पहचान कर सटीक प्रहार करने में सक्षम है, जिससे दुश्मन द्वारा भ्रम फैलाने की कोशिशें बेअसर हो जाती हैं। इसके साथ ही यह प्रणाली एक साथ कई हवाई खतरों से निपटने की क्षमता भी रखती है, जो आधुनिक युद्ध में बेहद अहम मानी जाती है।

पुरानी आकाश प्रणाली की तुलना में आकाश-एनजी अधिक हल्की, तेज़ और अधिक सटीक है। इसमें आधुनिक नियंत्रण और मार्गदर्शन तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे प्रतिक्रिया समय कम होता है और लक्ष्य को नष्ट करने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की वायु रक्षा जरूरतों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण प्रणाली माना जा रहा है।

भारतीय सेना और वायु सेना के लिए आकाश-एनजी का महत्व बहुत बड़ा है। इसके शामिल होने से सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों की वायु सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। साथ ही यह विदेशी रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता को भी कम करेगा। स्वदेशी तकनीक से बनी यह प्रणाली देश की बहु-स्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाएगी।

आकाश-एनजी पूरी तरह देश में विकसित तकनीक पर आधारित है। इसके सभी प्रमुख घटक, जैसे रडार, नियंत्रण प्रणाली और प्रक्षेपण व्यवस्था, स्वदेशी हैं। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है, जिससे न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को बल मिलेगा, बल्कि देश के रक्षा उद्योग को भी नई गति मिलेगी।

उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों की सफलता के बाद अब इस प्रणाली को औपचारिक रूप से सेना में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। आने वाले समय में इसके विभिन्न स्थानों पर तैनात होने की संभावना है, जिससे भारत की वायु सुरक्षा को एक नई और मजबूत ढाल मिल सकेगी। आकाश-एनजी का यह सफर देश की रक्षा क्षमता में एक निर्णायक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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