By: Ragini Chaubey
झारखंड सुंदर राज्य है। खनिज संपदा, घने जंगल और आदिवासी संस्कृति से लैस उसकी धरती है। झारखंड का नाम ट्रावेल के लिए मन में कम आता है। लेकिन, अगर आप बारिश के इस मौसम में यहां जा रहे हो, तो जादू का साक्षात्कार हो सकता है। जादू को देखने के लिए चलते है पतरातू घाटी।
राज्य के पाटनगर रांची से पतरातू घाटी ४० किलोमीटर दूर है। बारिश में यहाँ की पहाड़ियाँ गहरे हरे रंग की चादर ओढ़ लेती हैं। घाटी की घुमावदार सड़कें बादलों के बीच से गुजरती हैं। नीचे फैला विशाल पतरातू जलाशय इस जगह को चित्रकार की कल्पना-सा बना देता है। ये सर्पाकार घाट सड़कें पतरातू घाटी की पहचान है। ऊपर से देखने पर ये सड़कें अनेक तीखे मोड़ लेते हुए पहाड़ियों के बीच उतरती दिखाई देती है।
प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा यह क्षेत्र राज्य की संस्कृति, ग्रामीण जीवन और शांत वातावरण का आयना है। इसका माहौल यात्रियों को प्रकृति के सन्मुख ले आता हैं। और, यहां बच्चों से लेकर बुज़ुर्गौं के लिए कुछ न कुछ है। पतरातू घाटी में बारिश की बूंदों में भींगने के साथ-साथ क्या देखा जा सकता है, उसकी बात करते है।
पतरातू घाट रोडः रांची से घाटी की ओर उतरती यह सड़क अपने टेढ़े-मेढ़े मोड़ के लिए प्रसिद्ध है। उसे पार के ऊपर पहुंचना है। वहां के व्यू प्वाइंट से देखने पर यहां की सड़कें साँप की तरह दिखाई देगी। मानसून में यहां के पहाड़ घने वृक्षों से ढक जाते हैं। कभी हल्का तो कभी गहरा कोहरा जम जाता है। नीचे दिख रही हरियाली यात्रा को आकर्षक बना देती हैं। रास्ते भर में और चोटी पर भी, फोटोग्राफी तथा वीडियोग्राफी का आनंद उठाने से मन भरने वाला नहीं है। आश्चर्य नहीं है कि कई फिल्म और विज्ञापन शूट यहाँ हो चुके हैं।
पतरातू डैम और जलाशयः यहां की घाटी के नीचे फैला हुआ यह विशाल डैम है। यहां का वो एक सबसे बड़ा आकर्षण है। बरसात में जलाशय पूरी तरह छलक जाता है। ऊपर बादल मंडराते हैं। तब डैम का दृश्य मनमोहक हो जाता है। जलाशय के किनारे बैठकर प्रकृति का आनंद लेना अनोखी बात है। यहां सरकार द्वारा विकसित पर्यटन सुविधाएं तथा नौकायन और अन्य मनोरंजक गतिविधियाँ हैं।

पतरातू लेक रिसॉर्टः झारखंड पर्यटन विकास निगम विकसित यह रिसॉर्ट जलाशय के किनारे स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक सुविधाओं का वह सुंदर मेल है। स्पीड बोट, जेट स्की, पैडल बोट जैसी गतिविधियाँ यहां पर हैं। बच्चों के लिए भी मनोरंजन है।
पतरातू वैली व्यू प्वाइंटः घाटी का सर्वोत्तम दृश्य देखने के लिए इस व्यू प्वाइंट पर जाना रहा। ये वो जगह है जहां से विस्तार की सर्पाकार घाट सड़कें, नीचे जलाशय और चारों ओर की पहाड़ियाँ एक साथ दिखाई देते हैं। बारिश में इसका जो रूप दिखाई देता है उससे अलग साफ मौसम में होता है। दोनों में आंखों को ठंड़क मिलती है।
रजरप्पा मंदिरः यह जगह पतरातू से लगभग ७० किलोमीटर की दूरी पर है। रजरप्पा मंदिर राज्य के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। मंदिर भैरवी और दामोदर नदियों के संगम पर है। आसपास चट्टानें, बहता जल और घने वृक्ष है। मंदिर माँ छिन्नमस्तिका को समर्पित है।
रांचीः पतरातू और रांची एकमेक के करीब है। यात्रा में रांची भी घूमा जा सकता हैं। रॉक गार्डन, कांके डैम, टैगोर हिल, नक्षत्र वन, बिरसा जैविक उद्यान और स्थानीय बाजार देखे जा सकते है। झारखंड की इस सांस्कृतिक राजधानी में स्थानीय हस्तशिल्प, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक जीवन की झलक देखने मिलती है।
खाने-पीने का क्या करें? पतरातू और रांची में शाकाहारी भोजन की कठिनाई नहीं है। दाल, चावल, रोटी, मौसमी और आलू वगैरह की सब्जियाँ सर्वत्र मिल जाती हैं। पारंपरिक व्यंजनों में धुस्का, पीठा, रुगड़ा, चना घुघनी, चिलका रोटी, अरसा, ठेकुआ और विभिन्न प्रकार की दालें चखनी चाहिए। नाश्ते में कचौड़ी, जलेबी और स्थानीय चाय लोकप्रिय हैं। उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय, गुजराती, जैन और शुद्ध शाकाहारी रेस्तराँ भी रांची में हैं।
मुंबई से पतरातू जाने का सबसे उत्तम विकल्प हवाई यात्रा है। मुंबई से रांची के लिए सीधी तथा स्टोप-ओवर वाली फ्लाइट्स हैं। एयरपोर्ट से घाटी लगभग ४० किलोमीटर पर है। रांची के कई ट्रेनें भी हैं। फिर, आगे की जर्नी बाय रोड की जै सकती है। तो कीजिए तैयारी, रांची समेत पतरातू घाटी घूमने की।
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