सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मामले प्रबंधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित टूल्स का उपयोग किया जा रहा है। इनका प्रयोग संविधान पीठ के मामलों में मौखिक दलीलों को लिपिबद्ध करने के लिए किया जा रहा है। एआई की सहायता से लिखी गई दलीलों को सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। सक्षम प्राधिकारी ने नियमित सुनवाई के दिनों, यानी हर गुरुवार को मौखिक दलीलों को लिपिबद्ध करने पर विचार करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के साथ मिलकर एआई और एमएल आधारित टूल्स का उपयोग कर रही है, जिससे अंग्रेजी भाषा के निर्णयों का अनुवाद 18 भारतीय भाषाओं असमिया, बंगाली, गारो, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, खासी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, ओडिया, पंजाबी, संताली, तमिल, तेलुगु और उर्दू में किया जा सके। ये अनुवाद सर्वोच्च न्यायालय के ईएससीआर पोर्टल पर उपलब्ध होंगे।
इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से एआई और एमएल आधारित टूल्स विकसित किए हैं, जो रजिस्ट्री के इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सॉफ्टवेयर के साथ एकीकृत हैं। इन टूल्स की सहायता से दस्तावेज़ों में त्रुटियों की पहचान की जाती है। हाल ही में, 200 एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड को इस प्रोटोटाइप की पहुँच दी गई है, ताकि वे इसका उपयोग कर सकें और अपनी प्रतिक्रिया साझा कर न्याय तक पहुँच और न्याय प्रशासन को मजबूत कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री, आईआईटी मद्रास के सहयोग से डेटा विश्लेषण, मेटा डेटा निष्कर्षण और दोष सुधार के लिए एआई और एमएल टूल्स के प्रोटोटाइप्स का परीक्षण कर रही है। इन टूल्स को इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग मॉड्यूल और केस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर इंटीग्रेटेड केस मैनेजमेंट एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम (आईसीएमआईएस) के साथ एकीकृत किया जाएगा।
हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्णय लेने की प्रक्रिया में एआई और एमएल आधारित किसी भी टूल का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
“सुप्रीम कोर्ट पोर्टल असिस्टेंस इन कोर्ट एफिशिएंसी” (एसयूपीएसीई) नामक एआई आधारित टूल का विकास प्रयोगात्मक चरण में है। इसका उद्देश्य न केवल मामलों की पहचान करना बल्कि पूर्व निर्णयों की बुद्धिमान खोज और मामलों के तथ्यात्मक पहलुओं को समझने में सहायता करना है। ग्राफिक प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) और टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) जैसी नवीनतम तकनीक-आधारित इकाइयों की खरीद और तैनाती के बाद एसयूपीएसीई का पूर्ण उपयोग संभव होगा।
इस संबंध में विधि एवं न्याय मंत्रालय में (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।


