मुंबई पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी केस का पर्दाफाश किया है। मालवणी पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को धर दबोचा है जो बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करता था। इस गिरोह ने लोगों के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की है।
कैसे करते थे ठगी?
यह गैंग नौकरी की तलाश में लगे लोगों को फोन या मैसेज करके आकर्षक ऑफर देता था। नौकरी दिलाने के बहाने वे आधार कार्ड, पैन कार्ड और एड्रेस प्रूफ जैसे जरूरी दस्तावेज मांगते थे। लेकिन असल में ये दस्तावेज फर्जी कंपनियां बनाने और बैंक अकाउंट खोलने में इस्तेमाल किए जाते थे। इन अकाउंट्स के जरिए साइबर ठगी का पैसा लेनदेन किया जाता था।
जीएसटी नोटिस से खुलासा
पूरा मामला तब सामने आया जब मालवणी की एक 20 साल की लड़की को जीएसटी विभाग से नोटिस मिला। यह नोटिस एक ऐसी कंपनी के नाम पर था जो कभी अस्तित्व में ही नहीं थी, लेकिन उस लड़की के दस्तावेजों से रजिस्टर की गई थी। जांच में पता चला कि इस फर्जी कंपनी के अकाउंट से सिर्फ चार महीने में 3.42 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था।
गोरेगांव से दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने शिकायत के आधार जांच शुरू की और गोरेगांव से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के नाम अभिषेक पांडे (बोरिवली निवासी) और आकाश विश्वकर्मा (कांदिवली निवासी) हैं। पूछताछ में दोनों ने कबूल किया कि वे कई लोगों के साथ ऐसी ठगी कर चुके हैं। हर ट्रांजेक्शन पर उन्हें 5,000 रुपये कमीशन मिलता था।
पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने पर छापा मारकर भारी मात्रा में सबूत जब्त किए:
- 204 सिम कार्ड
- 115 बैंक पासबुक
- 271 डेबिट/क्रेडिट कार्ड
- लैपटॉप, मोबाइल और प्रिंटर
वरिष्ठ निरीक्षक शैलेंद्र नगरकर ने बताया कि यह सारा सामान धोखाधड़ी के काम आता था।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। साथ ही, उन लोगों को भी ढूंढा जा रहा है जिनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हुआ है।
पुलिस ने लोगों से सावधान रहने की अपील की है। किसी भी नौकरी के ऑफर के लिए बिना जांच-पड़ताल किए अपने दस्तावेज किसी को न दें। अगर कोई संदेह हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।


