अगर आप या आपके परिवार में कोई बुजुर्ग, महिला या दिव्यांग सदस्य है जो अक्सर ट्रेन से सफर करता है, तो यह खबर आपके लिए है। भारतीय रेलवे ने लोअर बर्थ के आवंटन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है जिससे इन यात्रियों को यात्रा करने में आसानी होगी।
क्या है नया नियम?
रेलवे ने अपने सिस्टम में बदलाव करते हुए तय किया है कि:
1. सीनियर सिटीजन (60 वर्ष से अधिक आयु)
2. गर्भवती महिलाएं
3. दिव्यांग यात्री
अब इन सभी को ऑटोमैटिक तरीके से लोअर बर्थ आवंटित की जाएगी, बशर्ते कि वे टिकट बुक करते समय अपनी सही जानकारी दें। पहले यात्रियों को मैन्युअली लोअर बर्थ के लिए रिक्वेस्ट करनी पड़ती थी, लेकिन अब सिस्टम खुद ही उन्हें प्राथमिकता देगा।
यह बदलाव क्यों जरूरी था?
– बुजुर्गों के लिए परेशानी: ऊपर की बर्थ पर चढ़ना उतरना बुजुर्ग यात्रियों के लिए मुश्किल होता था।
– गर्भवती महिलाओं की सुविधा: प्रेग्नेंट महिलाओं को भी लोअर बर्थ की जरूरत होती है ताकि वे आराम से यात्रा कर सकें।
– दिव्यांग यात्रियों की समस्या: व्हीलचेयर यूजर्स या चलने फिरने में दिक्कत वाले यात्रियों के लिए लोअर बर्थ जरूरी होती है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
– बुकिंग के समय डिटेल्स भरें: यात्रियों को टिकट बुक करते समय अपनी सही उम्र या दिव्यांगता का प्रूफ देना होगा।
– ऑटोमैटिक अलोकेशन: IRCTC का सिस्टम अब इन श्रेणियों के यात्रियों को अपने आप लोअर बर्थ देगा (अगर उपलब्ध हो)।
– TDR का ऑप्शन: अगर किसी कारण से लोअर बर्थ नहीं मिलती, तो यात्री टिकट डिस्प्यूट रिफंड (TDR) के लिए आवेदन कर सकते हैं।
क्या अभी भी कोई समस्या हो सकती है?
हालांकि यह कदम सराहनीय है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं:
– अवेलेबिलिटी की समस्या: अगर ट्रेन में लोअर बर्थ पहले से ही बुक हो चुकी हों, तो सिस्टम ऑटोमैटिक अलॉटमेंट नहीं कर पाएगा।
– गलत जानकारी का दुरुपयोग: कुछ यात्री गलत तरीके से सीनियर सिटीजन या दिव्यांग का दर्जा लेकर लोअर बर्थ हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
यात्रियों की क्या प्रतिक्रिया है?
इस नए नियम का स्वागत किया जा रहा है। मुंबई की 65 वर्षीय रेखा शर्मा कहती हैं, “मैं अक्सर अपने बेटे के पास बैंगलोर जाती हूं। पहले मुझे लोअर बर्थ के लिए बहुत मिन्नतें करनी पड़ती थीं, लेकिन अब यह सुविधा मिलेगी तो यात्रा आसान हो जाएगी।”
रेलवे का यह फैसला उन यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा जिन्हें वास्तव में लोअर बर्थ की जरूरत होती है। अब देखना यह है कि इस नियम को कितने प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो ट्रेन यात्रा बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांगों के लिए और भी आरामदायक हो जाएगी!


