भद्रवाह की घाटियों में फिर से हलचल है। कुछ दिन पहले तक जो सन्नाटा छाया हुआ था, वो अब पर्यटकों की चहलकदमी से भर चुका है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद जो डर का माहौल बना था, उसे पीछे छोड़कर अब लोग फिर से इन बर्फीले नजारों का मज़ा लेने पहुंच रहे हैं।
डर, इंतज़ार और अब राहत
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे जम्मू-कश्मीर को हिला कर रख दिया था। 26 लोगों की मौत और कई घायल। इस घटना के बाद भद्रवाह के हाई-ऑल्टिट्यूड टूरिस्ट स्पॉट्स जैसे चतरगल्ला, गुलदांडा, पदरी, भाल पदरी और जय वैली को तुरंत बंद कर दिया गया था।
लेकिन अब, स्थानीय प्रशासन और सेना की फुर्तीले एक्शन से हालात काबू में हैं। भद्रवाह-पठानकोट हाईवे पर सेना, पुलिस और CRPF की तैनाती बढ़ा दी गई है। और अब फिर से इन वादियों के दरवाज़े खुल चुके हैं।
बर्फ जमी है, हौसला भी
गुलदांडा और चतरगल्ला की बर्फीली ढलानों पर बच्चों के किलकारियां गूंज रही हैं। सेल्फी ले रहे कपल्स, बर्फ में खेलते बच्चे, और चारों ओर एक अजीब सी राहत का एहसास।
इस बार तो सेना और पुलिस ने एक नया ही तरीका अपनाया, सैलानियों का फूलों से स्वागत किया गया। गुलाब के फूल! और यह छोटा सा इशारा लोगों के दिल को छू गया।
एक सीधा जवाब आतंकियों को… हम नहीं डरते
कुछ सैलानी तो यहां सिर्फ इसी मकसद से पहुंचे कि वो आतंकियों को जवाब दे सकें। गुजरात से आए एक ग्रुप ने साफ कहा कि उनका मकसद डर को हराना है।
और इस हिम्मत का असर आंकड़ों में भी दिखा। दोपहर 3 बजे तक नलठी चेकपोस्ट से 3,700 से ज्यादा सैलानी भद्रवाह में दाखिल हो चुके थे।
पर्यटन सिर्फ घुमक्कड़ी नहीं, ज़िंदगी का सहारा है
भद्रवाह की पूरी लोकल इकोनॉमी पर्यटकों पर टिकी हुई है। गुलदांडा-चतरगल्ला रूट पर करीब 250 परिवार ऐसे हैं जो टूरिज़्म से रोज़ी-रोटी कमाते हैं। हमला और बंदी के बाद लोग टूट से गए थे।
अब जब पर्यटक लौटे हैं, तो दुकानों के शटर फिर से उठ गए हैं। गाइड फिर से बुकिंग लेने लगे हैं। टैक्सी वाले मुस्कुरा रहे हैं।
सुरक्षा बनी रहेगी, लेकिन सैर भी चालू रहेगी
सुरक्षा व्यवस्था अब और भी मज़बूत की गई है। बर्फीले ग्लेशियरों से लेकर सेंसिटिव रूट्स तक लगातार पेट्रोलिंग हो रही है। लेकिन इस सख्ती के बीच भी मेहमाननवाज़ी में कोई कमी नहीं।
चाय की गर्म चुस्कियां, बर्फ में टहलकदमी, झरनों की ठंडी फुहारें, सब कुछ वैसे ही है, बस और ज्यादा महफूज़।
भद्रवाह ने फिर दिखाया… डर हारता है, जज़्बा जीतता है
आज अगर आप भद्रवाह पहुंचें तो वहां सिर्फ सुंदरता नहीं, एक जज़्बा भी महसूस करेंगे। ये जगह सिर्फ बर्फ या पहाड़ नहीं है, ये उम्मीद और हिम्मत का नाम है।


