मीरा-भायंदर पुलिस ने हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 100-दिन के परफॉर्मेंस कार्यक्रम में बाकी सभी पुलिस आयुक्तालयों को पीछे छोड़ दिया। ये कामयाबी सिर्फ किस्मत का खेल नहीं है, इसके पीछे है एक नई सोच, टेक्नोलॉजी का स्मार्ट इस्तेमाल और आम लोगों की सुविधा को प्राथमिकता देना।
हालांकि मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय महाराष्ट्र के सबसे नए डिवीज़नों में से है, लेकिन अपने छोटे से सफर में ही इसने बाकी पुराने सिस्टम्स को कड़ी टक्कर दी है।
तकनीक से आसान बना ट्रैफिक नियंत्रण
मीरा-भायंदर पुलिस ने चालान काटने के पुराने तरीकों को बदल दिया है। यहां CCTV कैमरों को इस तरह प्रोग्राम किया गया है कि हेलमेट न पहनने, तीन लोगों की सवारी या दूसरे ट्रैफिक उल्लंघनों को खुद पहचान लें।
इन कैमरों से जो फोटो मिलती हैं, उन्हें एक अफसर चेक करता है और तुरंत चालान जारी हो जाता है। बाकी जगहों पर पुलिस खुद मैनुअली वीडियो देखकर चालान बनाती है, जो ज्यादा समय और संसाधन लेता है।
वेबसाइट से लेकर वॉटर कूलर तक, हर स्तर पर सुधार
पुलिस की वेबसाइट अब मोबाइल पर भी आसानी से चलती है। साथ ही, यह ‘ग्रीन’ वेबसाइट है, यानी इसके सर्वर पर्यावरण पर असर नहीं डालते। तस्वीरों के साइज भी घटाकर लोगों के लिए डाउनलोडिंग आसान बनाई गई है।
स्टेशनों पर आने वाले लोगों को आराम मिले, इसके लिए विज़िटर्स रूम, साफ पानी और दिशा बताने वाली स्क्रीन भी लगाई गई हैं। बाहर लगे स्टैंड पर QR कोड स्कैन करके कोई भी अपना फीडबैक दे सकता है।
खुद पुलिस वालों के लिए भी बेहतर इंतज़ाम
कुछ अफसरों के ऑफिस पहले घरों में चल रहे थे। अब उन्हें MHADA बिल्डिंग्स में जगह मिल गई है। वहीं, पुलिस थानों के बाहर सालों से खड़ी खराब गाड़ियां कोर्ट के आदेशों से हटवा दी गई हैं, जिससे साफ-सफाई भी सुधरी है।
बच्चों को लेकर संवेदनशील रुख
अगर कोई बच्चा किसी अपराध का शिकार हो, तो उससे बात करना एक आम केस से अलग होता है। इसी बात को समझते हुए पुलिसकर्मियों को UNICEF से ट्रेनिंग दिलवाई गई है। जल्द ही थानों में ऐसे कमरे होंगे जहां बच्चों के लिए खिलौने और रंग-बिरंगे पोस्टर होंगे, ताकि वे खुलकर अपनी बात कह सकें।
छोटी उम्र, बड़ी सोच
मीरा-भायंदर पुलिस ने यह दिखा दिया है कि उम्र मायने नहीं रखती—सोच मायने रखती है। टेक्नोलॉजी, सुविधा और संवेदनशीलता का संतुलन बनाकर वे महाराष्ट्र के सबसे बेहतरीन पुलिस डिवीजनों में शुमार हो गए हैं। उम्मीद है कि बाकी हिस्से भी इस सोच से प्रेरणा लेंगे।


