मुंबई में 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन अभ्यास’ के तहत एक व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य नागरिकों और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों का परीक्षण करना था। यह अभ्यास गृह मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित किया गया था, जिसमें हवाई हमले, ब्लैकआउट और आपातकालीन बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
दोपहर 4 बजे, दक्षिण मुंबई के क्रॉस मैदान में सायरन बजते ही मॉक ड्रिल शुरू हुई। इसमें हवाई हमले की स्थिति का अनुकरण किया गया, जिसमें तीन ‘बम विस्फोट’ और आग लगने की घटनाएं शामिल थीं। सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, बीएमसी, होम गार्ड्स, एनसीसी, एनएसएस और पैरामेडिक्स की टीमों ने मिलकर ‘घायलों’ को बचाया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
चर्चगेट स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर भी इसी तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की गई, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने भाग लिया। इसके अलावा, मुंबई के अन्य रेलवे स्टेशनों जैसे दादर, माटुंगा, लोकमान्य तिलक टर्मिनस और मानमाड में भी आपातकालीन तैयारियों का अभ्यास किया गया।
शाम को, अनुषक्ति नगर और तारापुर में ब्लैकआउट अभ्यास किया गया, ताकि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के पास आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की प्रतिक्रिया का परीक्षण किया जा सके।
महाराष्ट्र सिविल डिफेंस के निदेशक प्रभात कुमार ने बताया कि यह अभ्यास अगले 4-5 दिनों तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य नागरिकों को आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार करना और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना है।
हालांकि, मुंबई में स्थापित 272 सायरनों में से केवल 39 ही कार्यशील हैं, जिससे आपातकालीन चेतावनी प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि सायरनों की मरम्मत और उन्नयन की प्रक्रिया जारी है।


