कैसे पाकिस्तान की सेना एक समानांतर अर्थव्यवस्था और सत्ता केंद्र बन चुकी है, और इसका आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
परिचय
जहां अधिकतर लोकतांत्रिक देशों में सेना का काम देश की रक्षा तक सीमित होता है, वहीं पाकिस्तान में सेना एक समानांतर सरकार की भूमिका निभा रही है। रक्षा के अलावा यह राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन तक पर कब्जा जमाए बैठी है। फर्टिलाइजर से लेकर रियल एस्टेट तक, पाकिस्तान की सेना अरबों डॉलर के व्यापारिक साम्राज्य की मालिक है, जिसे न तो पारदर्शिता का डर है और न ही किसी कानूनी जवाबदेही का।
सेना का व्यापारिक साम्राज्य: बैरक से बोर्डरूम तक
पाकिस्तान की सेना का आर्थिक साम्राज्य धीरे-धीरे पनपा, लेकिन 1980 और 1990 के दशक में इसने तेज़ी से जड़ें जमाईं। आज विभिन्न “फाउंडेशनों” और कंपनियों के माध्यम से सेना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करती है।
प्रमुख सैन्य स्वामित्व वाली संस्थाएं:
- फौजी फाउंडेशन (Fauji Foundation)
1954 में पूर्व सैनिकों की भलाई के लिए शुरू हुई थी। आज यह फर्टिलाइज़र, सीमेंट, बैंकिंग (आस्करी बैंक), खाद्य उत्पाद और पावर जैसे क्षेत्रों में 100 से अधिक कंपनियों का संचालन करती है। - आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट (AWT)
सीमेंट, बीमा, एविएशन और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में व्यापार करता है। इसे पाकिस्तानी सेना द्वारा संचालित किया जाता है। - शाहीन फाउंडेशन
वायुसेना के अधीन है। यह एविएशन, मीडिया और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापार करती है। - बहरीया फाउंडेशन
नौसेना द्वारा संचालित। समुद्री सेवाएं, ऊर्जा और स्कूलों के क्षेत्र में कार्यरत है। - डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (DHA)
कराची, लाहौर, इस्लामाबाद जैसे शहरों में बड़ी मात्रा में ज़मीन का मालिक। आलीशान कॉलोनियों के निर्माण में लगी हुई है, लेकिन इन योजनाओं के चलते गरीबों की बस्तियां उजाड़ दी जाती हैं।
भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी
रक्षा मामलों की विशेषज्ञ डॉ. आयशा सिद्दीका की पुस्तक Military Inc. के अनुसार, सेना के व्यापारिक साम्राज्य का मूल्य 20 अरब डॉलर से भी अधिक हो सकता है।
इस व्यापारिक साम्राज्य की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पर कोई सिविलियन ऑडिट नहीं होता। ये कंपनियां कर मुक्त हैं और सरकार की पारदर्शिता प्रणाली से बाहर हैं।
महत्वपूर्ण आरोप:
- पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल क़मर जावेद बाजवा और उनके परिवार पर सत्ता के दौरान ₹12 अरब से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे। टैक्स दस्तावेज़ों की लीक से यह खुलासा हुआ।
- Pandora Papers में कई रिटायर्ड और वर्तमान सैन्य अफसरों के विदेशी खातों और संपत्तियों की जानकारी सामने आई।
इस तरह के मामले यह दिखाते हैं कि सेना के भीतर सत्ता और भ्रष्टाचार का गहरा गठजोड़ बना हुआ है, और आम जनता इसके परिणाम भुगत रही है।
आम नागरिकों पर प्रभाव
सेना द्वारा भूमि अधिग्रहण और व्यावसायिक उपयोग के चलते हज़ारों लोग बेघर हो चुके हैं। उदाहरण के लिए, कराची और लाहौर जैसे शहरों में DHA की कॉलोनियों के लिए गांवों की जमीन जबरदस्ती अधिग्रहित की गई है।
इसके अलावा:
- सैन्य कंपनियों को टैक्स में छूट मिलती है, जिससे निजी व्यापारी मुकाबला नहीं कर पाते।
- स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश कम होता जा रहा है क्योंकि संसाधन सैन्य व्यापारों में झोंक दिए जाते हैं।
- सेना की राजनीतिक दखलंदाज़ी से लोकतंत्र कमजोर हो रहा है और चुनी हुई सरकारें केवल सेना के हितों की रक्षा करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसे विदेशी फंडेड प्रोजेक्ट्स पर भी सेना का कब्जा है। ये प्रोजेक्ट आम जनता के हित में नहीं, बल्कि सैन्य व कॉर्पोरेट वर्ग के फायदे के लिए चलते हैं।
इससे पाकिस्तान की विदेश नीति अपारदर्शी हो गई है, जहां सैन्य समझौते राजनयिक चर्चाओं से ज़्यादा प्रभावशाली बन गए हैं।
एक वर्दीधारी सत्ता का साया
पाकिस्तान की सेना का आर्थिक और राजनीतिक वर्चस्व देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। जब तक सेना के व्यापारिक साम्राज्य पर सिविल नियंत्रण, पारदर्शी ऑडिट और राजनीतिक जवाबदेही नहीं होगी, तब तक आम पाकिस्तानी नागरिक आर्थिक शोषण और लोकतांत्रिक अनदेखी के शिकार होते रहेंगे।


