पुणे का ऐतिहासिक सिंहगढ़ किला, जो छत्रपति शिवाजी महाराज और नरवीर तानाजी मालुसरे की वीरता का प्रतीक है, एक बार फिर सुर्खियों में है। 29 मई, 2025 को वन विभाग ने किले के आसपास अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की, जिसके चलते किला पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। यह कार्रवाई सुरक्षा कारणों से शुरू की गई है, क्योंकि अतिक्रमण हटाने के दौरान बड़े पत्थर और मलबा गिरने का खतरा है।
सिंहगढ़ किला: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
सिंहगढ़ किला, जिसे पहले कोंधाणा किला के नाम से जाना जाता था, पुणे से लगभग 35 किलोमीटर दूर सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में 1,312 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। 1670 में तानाजी मालुसरे ने मुगल सेनापति उदयभान राठौड़ से इस किले को जीता था, जिसे मराठा इतिहास में एक गौरवशाली क्षण माना जाता है। यह किला न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मानसून के दौरान हरे-भरे दृश्यों के लिए भी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। हर साल लाखों लोग खडकवासला और सिंहगढ़ क्षेत्र में ट्रेकिंग, पिकनिक, और इतिहास का आनंद लेने आते हैं।
अतिक्रमण की समस्या
पिछले कुछ वर्षों से सिंहगढ़ किले के आसपास अवैध अतिक्रमण एक बड़ी समस्या बन गई है। 2022 में वन विभाग ने 135 अवैध स्टॉल्स हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, जो खाने-पीने की दुकानों और छोटे-मोटे व्यवसायों के रूप में किले के प्रवेश द्वार और पार्किंग क्षेत्र में फैले थे। इन स्टॉल्स ने न केवल किले की सौंदर्यता को प्रभावित किया, बल्कि प्लास्टिक कचरे और पर्यावरण प्रदूषण को भी बढ़ावा दिया। 2024 में विधायक भीमराव तपकीर ने किले की दीवारों के पास कचरे के ढेर और परित्यक्त संचार टावरों की समस्या को उजागर किया था।
इस बार, मई 2025 में वन विभाग ने फिर से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया। लोकशाही मराठी और टीवी9 मराठी के X पोस्ट्स के अनुसार, 29 मई को किला पूरे दिन पर्यटकों के लिए बंद रहा, और ट्रेकिंग मार्ग, जैसे कल्याण दरवाजा और आतकरवाड़ी, भी बंद किए गए। यह कार्रवाई किले के पार्किंग क्षेत्र और घाट रोड के आसपास केंद्रित है, जहाँ अवैध दुकानें और संरचनाएँ हटाई जा रही हैं।
सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंताएँ
सिंहगढ़ किला मानसून के दौरान भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं के लिए भी जाना जाता है। मई 2025 में मानसून की शुरुआत के साथ, घाट रोड पर दरारें और मलबे की समस्या बढ़ गई थी। पुणे पल्स के अनुसार, 21-23 मई को किला बंद किया गया था ताकि घाट रोड की मरम्मत की जा सके। हालाँकि अधिकांश मरम्मत पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ काम बाकी है, जिसके लिए वन विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) मिलकर काम कर रहे हैं। अतिक्रमण हटाने के दौरान बड़े पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है, जिसके कारण पर्यटकों और ट्रेकर्स की सुरक्षा के लिए किला बंद करना जरूरी हो गया।
2023 में भी एक भूस्खलन की घटना में पुणे दरवाजा के पास पत्थर गिरे थे, जिससे विक्रेताओं का सामान क्षतिग्रस्त हुआ था। वन विभाग ने तब से सुरक्षा जाल (सेफ्टी मेश) लगाने के लिए 1 करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन मानसून से पहले काम पूरा नहीं हो सका।
पर्यटकों पर प्रभाव
सिंहगढ़ किला पुणे के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है, खासकर मानसून में। किले की चढ़ाई, खडकवासला की हरियाली, और स्थानीय व्यंजन जैसे भजिया और दही पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन बार-बार बंदी और अतिक्रमण कार्रवाई ने पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ा है। 2022 में E-बसों की शुरुआत के बाद निजी वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया, जिससे कई पर्यटक घंटों तक फँस गए। 2025 में भी, 29 मई को आपातकालीन पाहणी (निरीक्षण) और अतिक्रमण हटाने के कारण किला बंद रहा, जिससे पर्यटकों की योजनाएँ प्रभावित हुईं।
वन विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे वैकल्पिक तारीखों पर किले की यात्रा करें और सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें। ट्रेकर्स को आतकरवाड़ी और अन्य पैदल मार्गों पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि बारिश के कारण रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं।
संरक्षण और भविष्य की योजनाएँ
सिंहगढ़ किले के संरक्षण के लिए सरकार और वन विभाग कई कदम उठा रहे हैं। 2023 में कल्याण दरवाजा और आसपास के क्षेत्रों के संरक्षण के लिए 3.75 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। इसके अलावा, पार्किंग क्षेत्रों को व्यवस्थित करने, दिशा-निर्देश बोर्ड लगाने, और E-बस सेवाओं को बेहतर करने की योजनाएँ हैं। 2024 में पहली बार एवरेस्टिंग प्रतियोगिता का आयोजन सिंहगढ़ किले पर हुआ, जिसने किले को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
वन विभाग ने कचरा प्रबंधन के लिए भी कदम उठाए हैं। 2022 में नूडल्स और वेफर्स जैसी पैकेज्ड खाद्य वस्तुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था ताकि प्लास्टिक प्रदूषण को कम किया जा सके।सिंहगढ़ किला केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि मराठा इतिहास और पुणे की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और सुरक्षा उपाय किले की सुंदरता और ऐतिहासिकता को बचाने के लिए जरूरी हैं। पर्यटकों को चाहिए कि वे वन विभाग के दिशानिर्देशों का पालन करें और कचरा प्रबंधन में सहयोग करें। पुणे न्यूज़ और लोकसत्ता जैसे स्रोतों से ताजा अपडेट्स प्राप्त करें ताकि आप अपनी यात्रा की योजना सही समय पर बना सकें। सिंहगढ़ की वीरता और प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।


