नोट: हमारे यहां द ओडिसी की कथा शायद रामायण या महाभारत की तरह सबके लिए परिचित ना हो। यह कथासार विशेष रूप से उन पाठकों के लिए है जो ग्रीक पौराणिक कथा से परिचित नहीं हैं और फिल्म देखने से पहले इसकी पृष्ठभूमि समझना चाहते हैं। जो दर्शक फिल्म देखने से पहले इसकी कहानी और प्रमुख घटनाओं से परिचित होना चाहते हैं, उनके लिए भी यह उपयोगी रहेगा। इसमें ऐसे कोई स्पॉइलर नहीं हैं जो फिल्म देखने का आनंद कम कर दें। अधिक से अधिक इतना होगा कि आपको यह अंदाज़ा मिल जाएगा कि क्रिस्टोफर नोलन ने कथा को किस तरह प्रस्तुत किया है। इसलिए यदि आप फिल्म देखने से पहले कुछ भी जानना नहीं चाहते, तो इस भाग को छोड़ सकते हैं। बाकी पाठकों के लिए प्रस्तुत है द ओडिसी का कथानक…
द ओडिसी की कथा नॉन-लीनियर शैली में आगे बढ़ती है। फिल्म की शुरुआत पर्दे पर उभरते इन शब्दों से होती है, “जादुई शक्तियों के युग में…”
स्थान है, इथाका द्वीप पर स्थित ओडिसियस का राजमहल। वहाँ एक लोकगायक कथा सुनाता है… “यह महल लंबे समय से अपने राजा ओडिसियस के बिना सूना पड़ा है। ट्रोजन युद्ध के बाद ओडिसियस लापता हो गए थे। एंटिनोअस सहित अनेक राजाऔर वर-प्रत्याशी अब इथाका का सिंहासन हथियाना चाहते हैं। वे ओडिसियस की पत्नी पेनेलोपी से विवाह करना चाहते हैं, उसके पुत्र टेलीमेकस को रास्ते से हटाना चाहते हैं। केवल पेनेलोपी, टेलीमेकस और वृद्ध, अर्धदृष्टिहीन यूमेयस को विश्वास है कि एक दिन ओडिसियस अवश्य लौटेंगे…”
अपने पिता का पता लगाने के लिए टेलीमेकस अपने गुरु और ओडिसियस के मित्र मेंटर के साथ स्पार्टा के राजा मेनेलाउस से मिलने जाता है। जब एंटिनोअस को इसकी जानकारी मिलती है, तो वह तय करता है, “जब टेलीमेकस वापस लौटेगा तो मैं उसकी हत्या कर दूँगा।” वह पेनेलोपी के दूसरे दावेदार पॉलीबस के साथ मिलकर इथाका को लूटने और सत्ता पर कब्ज़ा करने की साज़िश भी रचता है।
टेलीमेकस स्पार्टा पहुँचता है। वहाँ राजा मेनेलाउस और उनकी पत्नी हेलेन उसे ओडिसियस के अद्भुत कारनामों का वर्णन करते हैं। इन्हीं स्मृतियों के माध्यम से फिल्म ट्रोजन युद्ध की घटनाओं में प्रवेश करती है।
दर्शक देखते हैं कि किस तरह ओडिसियस अपने साथी सिनॉन की चतुराई का उपयोग करके विशाल लकड़ी के घोड़े के भीतर सैनिकों को छिपाकर ट्रॉय नगर में प्रवेश करता है।
सिनॉन स्वयं को ट्रॉय के राजा प्रियम और वहाँ के लोगों के सामने एक असहाय और परित्यक्त ग्रीक सैनिक के रूप में प्रस्तुत करता है। वह उन्हें विश्वास दिलाता है कि समुद्र तट पर पड़ा यह विशाल लकड़ी का घोड़ा देवी एथेना को समर्पित है और यदि इसे नगर के भीतर स्थापित किया गया, तो ट्रॉय हमेशा के लिए अजेय बना रहेगा।
ट्रॉय के लोग उसकी बातों में आ जाते हैं। वे घोड़े को नगर के भीतर ले आते हैं। रात होते ही उसके भीतर छिपे ओडिसियस और ग्रीक सैनिक बाहर निकलते हैं, नगर के द्वार खोल देते हैं और बाहर प्रतीक्षा कर रही यूनानी सेना भीतर प्रवेश कर देती है। भीषण युद्ध छिड़ता है। ट्रॉय का पतन हो जाता है और साथ ही, देवी एथेना का अपमान होता है।
ट्रोजन युद्ध के बाद अगामेम्नन और मेनेलाउस अपने-अपने राज्यों की ओर लौट जाते हैं। दूसरी ओर, ओडिसियस अपनी सेना और यूरिलोकस के साथ देवी एथेना के मार्गदर्शन में समुद्री यात्रा पर निकलता है। यात्रा के दौरान भोजन और रसद की तलाश में वे एक द्वीप पर पहुँचते हैं। वहाँ उनका सामना पॉलीफेमस नामक एक आंख वाले साइक्लोप्स से होता है, जो उन्हें बंदी बना लेता है। अपनी सूझबूझ से ओडिसियस और उसके साथी पॉलीफेमस की आँख फोड़कर वहाँ से भाग निकलते हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि पॉलीफेमस तो समुद्र के देवता पोसाइडन का पुत्र है। अपने पुत्र पर हुए आक्रमण से क्रोधित पोसाइडन ओडिसियस पर अपना प्रकोप बरपाकर उसकी समुद्री यात्रा अभिशापित कर देता है।
समुद्र में भटकते-भटकते वे ऐएआ द्वीप पर पहुँचते हैं। वहाँ विशालकाय लेस्ट्रिगोनियनों का हमला होता है। किसी तरह जान बचाकर निकले कुछ सैनिक ओडिसियस का साथ छोड़ देते हैं और सर्सी नामक डायन-जादूगरनी के आश्रय में पहुँच जाते हैं। सर्सी उन्हें सूअरों में बदल देती है। अपने साथियों को बचाने के लिए ओडिसियस मानवी में से हिरन बने हुए जीव को मार ड़ालता है। सर्सी उसे चेतावनी देती है, “यदि तुम्हें इथाका लौटना है तो तुम्हें ओशियनस नदी पार करके पाताललोक जाना होगा। केवल भविष्यवक्ता टायरेसियस की आत्मा ही तुम्हें बता सकती है कि पोसाइडन के क्रोध से बचते हुए अपने राज्य तक कैसे पहुँचना है।”
ओडिसियस पाताललोक में टायरेसियस की आत्मा से मिलता है। वह भविष्यवाणी करता है, “देवताओं की इच्छा है कि केवल तुम ही जीवित इथाका पहुँचोगे।” लेकिन ओडिसियस इस भविष्यवाणी को चुनौती देता है। वहीं उसकी भेंट सिनॉन की आत्मा से भी होती है। वो बताती है कि एंटिनोअस की साज़िश के कारण उसे यूनानी सेना में उसकी जगह लेने के लिए विवश किया गया था। इसके बाद अगामेम्नन की आत्मा प्रकट होती है। वह बताती है कि ट्रोजन युद्ध से लौटने के बाद उसकी पत्नी क्लाइटेमनेस्ट्रा ने उसकी हत्या कर दी थी। कारण यह था कि अनुकूल समुद्री यात्रा के लिए अगामेम्नन ने देवी आर्टेमिस को प्रसन्न करने हेतु अपनी ही पुत्री इफिजेनिया की बलि चढ़ा दी थी और उसी का प्रतिशोध उससे लिया गया।
इसी बीच ओडिसियस के मृत सैनिकों की आत्माएँ उसके जीवित बचे साथियों को पाताललोक से बाहर खदेड़ देती है। टायरेसियस के निर्देशों का पालन करते हुए ओडिसियस, यूरिलोकस और शेष सैनिक स्किल्ला, कैरिब्डिस और सायरन्स जैसी भयावह विपत्तियों का सामना करते हुए आगे बढ़ते हैं।
इसके बाद वे थ्रिनासिया द्वीप पर पहुँचते हैं। यहाँ ओडिसियस अपने साथियों को चेतावनी देता है, “टायरेसियस ने भविष्यवाणी की है कि यदि तुम सूर्यदेव हेलिओस की पवित्र गायों और बैलों को मारोगे, तो हममें से कोई भी जीवित नहीं बचेगा।” लेकिन भूख से व्याकुल सैनिक उसकी बात अनसुनी कर के उन पवित्र पशुओं का वध कर देते हैं। द्वीप से निकलने का प्रयास करते ही पोसाइडन भयंकर तूफ़ान भेजता है। जहाज़ समुद्र में डूब जाता है और ओडिसियस को छोड़कर उसके सभी साथी मारे जाते हैं।
अब अकेला ओडिसियस समुद्र की प्रचंड लहरों से जूझता हुआ ओगीजिया द्वीप के तट पर पहुँचता है। वहाँ उसकी मुलाकात अप्सरा कैलिप्सो से होती है। कैलिप्सो उसे अपने प्रेम में बाँध लेती हैं और उसका अतीत तथा परिवार भुला देने के लिए उसे विशेष कमल-पुष्प खिलाकर एक प्रकार के मोह में रखती हैं। अंततः सात सालों बाद उसे ओडिसियस की अपने परिवार के प्रति तड़प पर दया आती है। वह उसे एक अस्थायी बेड़े पर सवार होकर वहाँ से जाने की अनुमति दे देती हैं।
आखिरकार ओडिसियस इथाका पहुँच जाता है। वहाँ उसका वफ़ादार सेवक यूमेयस उसे बताता है कि अनेक वर-प्रत्याशियों ने महल में उत्पात मचा रखा हैं और पेनेलोपी से विवाह कर इथाका का राज्य हथियाना चाहते हैं। वह यह भी बताता है कि टेलीमेकस और मेंटर की हत्या के लिए उन लोगों ने मंदिर में पुजारियों के वेश में हत्यारे भेजे हैं।
इसके बाद मेंटर मारा जाता है, लेकिन ओडिसियस समय रहते टेलीमेकस को बचा लेता है। हालाँकि, अपनी वास्तविक पहचान छिपाते हुए वह स्वयं को सिनॉन बताता है और हमलावरों का अंत कर देता है।
टेलीमेकस उसे महल में ले जाता है। वहाँ वर्षों से अपने स्वामी की प्रतीक्षा कर रहा वफ़ादार कुत्ता आर्गोस ओडिसियस को पहचान लेता है और अंतिम साँस ले लेता है। टेलीमेकस भी अंततः ओडिसियस को अपने पिता के रूप में पहचानकर, स्वीकार कर लेता है।
इसके बाद महल में एक तनावपूर्ण भोज का आयोजन होता है। ओडिसियस एंटिनोअस से कहता है कि उसे सिनॉन के साथ किए गए उसके विश्वासघात की पूरी जानकारी है। भोज के बाद एक अत्यंत प्रभावशाली दृश्य आता है। अभी भी भेष बदले हुए ओडिसियस पेनेलोपी के सामने अपने अपराध स्वीकार करता है।
वह कहता है, “मैंने ट्रोजन हॉर्स की योजना बनाकर ज़्यूस के न्याय और पारस्परिक सम्मान के सिद्धांतों का उल्लंघन किया। मैंने निर्दोष ट्रॉयवासियों की हत्या की। मैंने देवी एथेना की पुजारिन की हत्या की और उनकी प्रतिमा का भी अपमान किया।” वह स्वीकार करता है कि उसके इन्हीं कर्मों के कारण समुद्रों में रक्तपिपासु योद्धा के रूप में उसकी कहानियाँ फैलीं और वह अपने किए पर पश्चाताप व्यक्त करते हुए क्षमा माँगता है।
इसके बाद पेनेलोपी अपने पुनर्विवाह की घोषणा करते हुए उपस्थित वर-प्रत्याशियों से कहती है, “जो इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर तीर को कुल्हाड़ियों के छिद्रों की पूरी पंक्ति के आरपार निकाल देगा, उसी से मैं विवाह करूँगी।” एक-एक करके सभी दावेदार असफल हो जाते हैं। तब भिक्षुक के वेश में खड़ा ओडिसियस आगे बढ़ता है। लोग उसका उपहास उड़ाते हैं, लेकिन वह सहजता से धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाता है और तीर को सभी छिद्रों के आरपार निकाल देता है।
इसके साथ ही वह अपनी वास्तविक पहचान प्रकट कर देता है। फिर एक-एक करके सभी दुष्ट वर-प्रत्याशियों का संहार करता है। जो जीवित बचते हैं, वे आत्मसमर्पण कर देते हैं। अंत में ओडिसियस इथाका का राजसिंहासन टेलीमेकस को सौंप देता है। मृतकों को सम्मान देने के बाद वह पेनेलोपी के साथ पश्चिम की ओर एक नई यात्रा पर निकल पड़ता है और…
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