By: Ragini Chaubey
मुंबई के अंधेरी ईस्ट में स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में एक्चुअरीज़ डे 2026 के मौके पर इंस्टिट्यूट ऑफ एक्चुअरीज़ ऑफ इंडिया (IAI) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, जहां एक पूरे पेशे के भविष्य का नक्शा खींचा गया।
सरल शब्दों में कहें तो, एक्चुअरी वे विशेषज्ञ होते हैं जो भविष्य के जोखिमों का अंदाज़ा लगाते हैं और पैसों से जुड़ी योजना बनाने में मदद करते हैं बीमा पॉलिसी का प्रीमियम तय करने से लेकर पेंशन फंड का हिसाब लगाने तक। यही वजह है कि बीमा और वित्तीय योजना जैसे क्षेत्रों में इनकी भूमिका काफी अहम हो जाती है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बड़ी घोषणाएं हुईं। IAI ने अपनी “ब्रांड बाइबल” लॉन्च की, जो अब संस्थान की पहचान और संवाद का पूरा ढांचा तय करेगी। इसके तुरंत बाद एक नया जॉब पोर्टल भी शुरू किया गया, जिसका मकसद एक्चुअरियल प्रोफेशनल्स और टैलेंट को सही एम्प्लॉयर्स तक पहुंचाना है। इसके अलावा 26वें ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ एक्चुअरीज़ (GCA) और एक्चुअरियल गाला फंक्शन एंड अवार्ड्स (AGFA) की आधिकारिक घोषणा भी की गई।
इस मौके पर कई बड़े नाम मौजूद थे डॉ. देबाशीष प्रुस्टी, एडिशनल सेक्रेटरी, DFS, वित्त मंत्रालय, जिन्होंने बताया कि सरकार एक्चुअरी एक्ट, 2006 में बदलाव करने पर IAI के साथ काम कर रही है; प्रीति चंद्रशेखर, अध्यक्ष, IAI; आशा मुरली, मानद सचिव, IAI; और माइक लोम्बार्डी, अध्यक्ष, इंटरनेशनल एक्चुअरियल एसोसिएशन, जो इस बात पर ज़ोर दे रहे थे कि एक्चुअरी अब सिर्फ बीमा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि स्वास्थ्य, वित्त, जलवायु जोखिम और सार्वजनिक नीति जैसे नए क्षेत्रों में भी अपनी जगह बना रहे हैं।
लेकिन सबसे दिलचस्प सवाल वही था जो आज हर पेशे को परेशान कर रहा है: अगर AI इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, तो एक्चुअरीज़ का क्या होगा?
जब हमने यह सवाल प्रीति चंद्रशेखर और आशा मुरली से पूछा कि AI टेक्नोलॉजी के इस दौर में IAI एक्चुअरीज़ की कैसे मदद करेगा, तो दोनों का जवाब काफी सकारात्मक रहा। उनका कहना था कि AI बेशक बहुत आगे बढ़ चुका है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर में और व्यक्तिगत, इंसानी निर्णय वाले फैसलों में एक्चुअरीज़ की ज़रूरत और भी बढ़ेगी। उनके मुताबिक, टेक्नोलॉजी एक्चुअरीज़ की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनके काम को बेहतर बनाने के लिए आएगी, और इसी वजह से पेशे में नई नौकरियां और अवसर आने वाले हैं।
दूसरा सवाल हमने जॉब पोर्टल को लेकर पूछा फ्रेशर और छात्रों के लिए इस नए प्लेटफॉर्म से क्या मौके बनेंगे। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए यह सीखने और आगे बढ़ने के बहुत सारे मौके लेकर आएगा, और जॉब पोर्टल एक्चुअरियल छात्रों को सही एम्प्लॉयर्स तक पहुंचाने में सीधा मददगार साबित होगा।
माइक लोम्बार्डी ने भी अपने अंदाज़ में यही बात दोहराई। उनका कहना था कि AI ने संगठनों के फैसले लेने के तरीके को बदल दिया है, और एक्चुअरीज़ को इस बदलाव में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए, क्योंकि वही लोग मॉडल्स की ताकत और उनकी सीमाओं दोनों को समझते हैं।
IAI ने भीमटेक के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) भी साइन किया, ताकि कार्बन मार्केट्स जैसे नए क्षेत्र में भी एक्चुअरीज़ अपनी जगह बना सकें यह दिखाता है कि यह पेशा अब सिर्फ बीमा और पेंशन तक सीमित नहीं रहा।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों ने भी इस बदलाव की ज़रूरत साफ कर दी। देश में अभी सिर्फ करीब 100 फुली क्वालिफाइड एक्चुअरी हैं, जबकि IAI की कुल सदस्यता मार्च 2026 तक 12,186 तक पहुंच चुकी है अब तक की सबसे ज़्यादा संख्या। संस्थान का लक्ष्य 2031 तक सदस्यता 30,000 तक ले जाने का है।
एक्चुअरीज़ डे 2026 पर हुई ये सभी घोषणाएं सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि भारत में एक्चुअरियल पेशे को मज़बूत बनाने की तरफ एक सोच-समझा कदम मानी जा रही हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये कदम आने वाले समय में एक्चुअरीज़ के करियर पर कैसा असर डालते हैं।
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