अगर अब महाराष्ट्र में ओला, उबर या रैपिडो ड्राइवर आपकी बुक की हुई सवारी बिना वजह कैंसिल करता है, तो ऐप कंपनी को उसकी भरपाई करनी होगी। यह नया नियम है राज्य सरकार की एग्रीगेटर कैब्स पॉलिसी 2025 के तहत, जो 1 मई से लागू हो चुकी है।
सरकार ने यह पॉलिसी इसलिए लाई है क्योंकि पिछले कुछ समय से यात्रियों, खासतौर पर महिलाओं, की ओर से लगातार शिकायतें आ रही थीं। राइड कैंसिलेशन, मनमाना किराया और सुरक्षा को लेकर। अब ऐप-बेस्ड टैक्सी कंपनियों को महाराष्ट्र में काम करना है तो उन्हें सख्त नियमों का पालन करना होगा।
यात्रियों की सुरक्षा अब गंभीर मामला
नई नीति के मुताबिक, ऐप कैब कंपनियों को अब इन बातों का पालन करना होगा:
- राज्य सरकार से ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना ज़रूरी
- हर गाड़ी में GPS ट्रैकर लगाना
- ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य
- ऐप में इमरजेंसी बटन दिखना चाहिए
- महिलाओं के लिए सुरक्षित राइड-शेयरिंग सुविधा शुरू करनी होगी
- सर्ज प्राइसिंग 1.5 गुना से ज्यादा नहीं हो सकती
इसके अलावा, ड्राइवर को कम से कम 80 प्रतिशत ग्राहक संतोष स्कोर बनाए रखना होगा। अगर ड्राइवर लगातार शिकायतों में आता है, तो उसे सेवा से हटाया जा सकता है।
अब ड्राइवर के कैंसिल करने पर ग्राहक को हर्जाना
सबसे बड़ा बदलाव यही है, अगर कोई ड्राइवर बिना ठोस वजह के आपकी राइड कैंसिल करता है, तो अब उसकी सज़ा सिर्फ ग्राहक को नहीं भुगतनी होगी। ऐप कंपनी को अब ग्राहक को मुआवज़ा देना होगा।
ड्राइवरों को भी मिलेगा फायदा
ये नियम सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं हैं। ड्राइवरों की आय को लेकर भी सरकार ने साफ व्यवस्था दी है। अब हर बुकिंग से 80 प्रतिशत राशि सीधे ड्राइवर को जाएगी। इसके अलावा, उन्हें ट्रेनिंग, कल्याणकारी योजनाएं और तकनीकी सुविधा भी दी जाएगी। गाड़ियों की स्थिति खराब हुई तो उन्हें सेवा से हटाया जाएगा।
डाटा सुरक्षा और पारदर्शिता भी अहम
नई पॉलिसी में तकनीकी सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। कंपनियों को अब आईटी एक्ट के तहत साइबर सुरक्षा और यूज़र डाटा की रक्षा करनी होगी। साथ ही, महाराष्ट्र में अपना लोकल ऑफिस खोलना भी अनिवार्य होगा ताकि लोगों की शिकायतों का तुरंत समाधान हो सके।
यह पॉलिसी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और रिटायर्ड IAS अधिकारी सुधीर कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बनी समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार हुई है। इसका मकसद है, यात्रियों और ड्राइवरों दोनों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद सफर का माहौल बनाना।
अब महाराष्ट्र सरकार का संदेश बिल्कुल साफ है, अब कोई शॉर्टकट नहीं चलेगा, और न ही बहाने।


