मुंबई को जल्द ही उसकी पहली अमृत भारत एक्सप्रेस मिलने वाली है। ये नई ट्रेन बिहार के सहरसा से चलकर मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT) तक जाएगी। इससे मुंबई और पूर्वी भारत के बीच सीधी कनेक्टिविटी बनेगी। देशभर में यह तीसरी अमृत भारत ट्रेन होगी—पहली दरभंगा से आनंद विहार और दूसरी मालदा टाउन से बेंगलुरु के बीच चलाई गई थी।
अब बात करें इसकी खासियत की तो ये ट्रेन खासतौर पर आम यात्रियों के लिए बनाई गई है। नॉन-एसी, सुपरफास्ट और लंबी दूरी (800 किलोमीटर से ज़्यादा) के लिए डिज़ाइन की गई इस ट्रेन में स्लीपर और जनरल कोच होंगे। इसे आप ‘आम आदमी की वंदे भारत’ भी कह सकते हैं।
इस ट्रेन का रूट भी खासा व्यस्त है—यह समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दानापुर, बक्सर और दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन (जिसे पहले मुगलसराय कहा जाता था) से होकर गुज़रेगी। यानी बिहार या पास-पड़ोस के लोगों के लिए यह ट्रेन काफी काम की साबित हो सकती है।
अमृत भारत एक्सप्रेस ‘पुश-पुल’ तकनीक पर चलेगी, मतलब दोनों सिरों पर इंजन होगा। इससे स्टेशन पर ट्रेन को घुमाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी—जो कि समय की बड़ी बचत करता है। इसकी अधिकतम स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा है।
इस ट्रेन के कोच चेन्नई के इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनाए गए हैं। रेलवे का प्लान है कि ऐसी 200 ट्रेनें चलाई जाएं। 50 पर काम हो चुका है, बाकी पाइपलाइन में हैं।
लेकिन हर कोई इससे खुश नहीं है।
रेलवे से जुड़े कई एक्टिविस्ट और नियमित यात्री मानते हैं कि यह रूट पहले से ही काफी ट्रेनों से कवर हो रहा है। उनके अनुसार रेलवे को उन रूट्स पर ध्यान देना चाहिए था जहां आज भी ट्रेनें 3-4 बार इंजन बदलने के लिए रुकती हैं—जैसे कोल्हापुर-नागपुर एक्सप्रेस या पुणे-अमरावती एक्सप्रेस। इन रूट्स पर अगर पुश-पुल ट्रेन चलाई जाती, तो घंटों की बचत होती।
कुछ यात्रियों का कहना है कि मुंबई से चेन्नई और बेंगलुरु जैसी जगहों के लिए आज भी ट्रेनें बेहद धीमी हैं। पटरियां तेज़ चलने के लायक हो चुकी हैं, फिर भी ट्रेनें औसतन 56 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही हैं। ऐसे रूट्स पर अमृत भारत या वंदे स्लीपर ट्रेनों की ज़रूरत ज़्यादा है।
इसके अलावा चिंता ये भी है कि नई ट्रेन मुंबई के लोकल ट्रैफिक को प्रभावित कर सकती है। कासारा से कल्याण और फिर ठाणे तक का रूट मुंबई लोकल ट्रेनों के साथ ओवरलैप करेगा। अगर ये ट्रेन तीसरी या चौथी लाइन पर चलती है, तो वहां की लोकल सेवाएं धीमी पड़ सकती हैं। लोग इसकी तुलना रत्नागिरी-दादर सेवा से कर रहे हैं, जो कुछ ही स्टेशनों पर लोकल लाइन से टकराती है।
रेलवे प्रेमी ये भी कह रहे हैं कि कई ज़रूरी पैसेंजर ट्रेनें अभी तक कोविड के बाद वापस नहीं आई हैं—जैसे भुसावल-मुंबई पैसेंजर और पुणे-पनवेल पैसेंजर। लेकिन दूसरी तरफ, बाहर की ट्रेनों को नई जगहें दी जा रही हैं।
कुल मिलाकर, अमृत भारत एक्सप्रेस एक अच्छी पहल है। लेकिन लोग मानते हैं कि इसका बेहतर इस्तेमाल महाराष्ट्र के पुराने रेलवे संकटों को सुलझाने में किया जा सकता था।


