पाकिस्तान की सियासत में गर्मी उस वक्त और बढ़ गई जब पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत को कड़ी चेतावनी दी। सिंधु जल संधि के निलंबन पर प्रतिक्रिया देते हुए भुट्टो ने कहा, “या तो हमारा पानी बहेगा, या उनका खून।”
यह तीखा बयान उन्होंने सिंध प्रांत के ठट्टा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दिया। भारत ने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे, पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कई सख्त कूटनीतिक कदम उठाए थे। इन्हीं में से एक था, सिंधु जल संधि को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित करना।
भारत ने तोड़ी सिंधु जल संधि
भारत ने 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी इस संधि से खुद को अलग करने का ऐलान कर दिया। दशकों तक युद्ध और तनाव के बावजूद यह संधि कायम रही थी, लेकिन अब भारत ने पाकिस्तान पर ‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’ और ‘शांति समझौतों के दुरुपयोग’ का आरोप लगाते हुए इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम इसलिए जरूरी हो गया था क्योंकि पाकिस्तान लगातार भरोसे और शांति प्रयासों को कमजोर कर रहा था। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तानी राजनयिकों को निष्कासित किया और सभी द्विपक्षीय वार्ताएं भी रोक दीं।
भुट्टो की धमकी पर अंतरराष्ट्रीय चिंता
भारत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बिलावल भुट्टो ने भारत पर ‘पानी चोरी’ का आरोप लगाया और इसे ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार दिया। उनके “पानी या खून” वाले बयान ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी, खासकर जब दोनों देश परमाणु ताकत रखते हैं।
भुट्टो ने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान को उकसाने और आंतरिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के भीतर भी उनके बयान को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ ने इसे “जिम्मेदाराना बयानबाजी” बताया तो कुछ ने “अनावश्यक युद्धोन्माद” करार दिया।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
नई दिल्ली में भुट्टो के बयान की तीखी निंदा की गई। कई नेताओं ने इसे पाकिस्तान की “आक्रामक मानसिकता” और “अंतरराष्ट्रीय नियमों के प्रति घोर अनादर” का प्रमाण बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि भारत किसी भी धमकी से दबने वाला नहीं है।
सरकारी बयान में दोहराया गया कि भारत सिंधु नदी प्रणाली पर अपने अधिकारों की रक्षा करेगा और कोई भी धमकी उसे अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटा सकती।
दुनिया भर से अपील और चेतावनी
विश्व बैंक, जो संधि का गारंटर है, ने दोनों देशों से संयम बरतने और संवाद बनाए रखने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र ने भी गहरी चिंता जताई और तनाव को बढ़ाने से बचने का आग्रह किया।
चीन ने “शांति और कूटनीति” पर जोर दिया, वहीं अमेरिका ने कहा कि “भड़काऊ बयानबाजी क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ाती है।”
बड़ी तस्वीर
सिंधु जल संधि अब तक दक्षिण एशिया में जल कूटनीति की मिसाल मानी जाती थी। लेकिन जलवायु परिवर्तन और पानी की बढ़ती मांग के बीच इस संधि का टूटना किसानों और उद्योगों पर गहरा असर डाल सकता है।
विशेषज्ञ पहले से चेतावनी दे रहे हैं कि भविष्य के बड़े संघर्ष पानी को लेकर हो सकते हैं। भुट्टो का यह बयान हालात को और जटिल बना सकता है।


