पिछले एक दशक में भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल क्रांतियों में से एक देखी है। सस्ता इंटरनेट, किफायती स्मार्टफोन और बढ़ती ऑनलाइन पहुंच ने करोड़ों लोगों को डिजिटल दुनिया से जोड़ दिया है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट बाजारों में शामिल है, जहां लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल बातचीत के लिए नहीं, बल्कि पढ़ाई, खरीदारी, मनोरंजन और बैंकिंग जैसे कामों के लिए भी कर रहे हैं।

लेकिन जैसे-जैसे भारत डिजिटल रूप से आगे बढ़ रहा है, एक बड़ा सवाल भी सामने आ रहा है। क्या लोग सच में डिजिटल रूप से जागरूक हैं, या वे सिर्फ इंटरनेट इस्तेमाल करना सीख गए हैं?

इंटरनेट होना और डिजिटल समझ होना दोनों अलग बातें हैं। आज लाखों लोग रोज स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अब भी डिजिटल दुनिया के जोखिमों और जिम्मेदारियों को पूरी तरह नहीं समझते। यही कमी धीरे-धीरे भारत में एक नए सामाजिक अंतर का रूप ले रही है।

भारत में तेजी से बढ़ी इंटरनेट पहुंच

भारत में इंटरनेट का विस्तार बेहद तेज़ी से हुआ है। सस्ते डेटा प्लान आने के बाद इंटरनेट गांवों तक पहुंच गया। अब छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी लोग स्मार्टफोन के जरिए ऑनलाइन दुनिया से जुड़े हुए हैं।

सरकार की डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने भी ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा दिया है। कोरोना महामारी के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और बढ़ गया। ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल पेमेंट, टेलीमेडिसिन और वर्क फ्रॉम होम जैसी चीजें आम हो गईं।

आज लोग मोबाइल से बिजली का बिल भर रहे हैं, ट्रेन टिकट बुक कर रहे हैं और यूपीआई के जरिए तुरंत पैसे भेज रहे हैं। यहां तक कि छोटे दुकानदार और रेहड़ी वाले भी QR कोड के जरिए भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।

लेकिन सिर्फ इंटरनेट पहुंच जाना ही डिजिटल जागरूकता की गारंटी नहीं है।

इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले कई लोग अब भी डिजिटल रूप से कमजोर हैं

देश में बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट का इस्तेमाल मुख्य रूप से सोशल मीडिया, वीडियो देखने और मनोरंजन के लिए करते हैं। हालांकि डिजिटल साक्षरता का मतलब केवल ऐप चलाना नहीं होता।

डिजिटल रूप से जागरूक व्यक्ति वह होता है जो फर्जी खबर पहचान सके, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बच सके, अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रख सके और इंटरनेट का सही तरीके से इस्तेमाल कर सके। लेकिन भारत में अब भी बहुत से लोग इन बुनियादी बातों से अनजान हैं।

पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। फर्जी लिंक, साइबर फ्रॉड कॉल, नकली लोन ऐप और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई लोग सिर्फ जागरूकता की कमी के कारण अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं।

इसके अलावा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और फेक न्यूज भी तेजी से फैलती है। कई बार लोग बिना जांचे-परखे किसी भी मैसेज या वीडियो पर भरोसा कर लेते हैं।

यह दिखाता है कि आज के समय में डिजिटल जागरूकता इंटरनेट जितनी ही जरूरी हो चुकी है।

गांवों और क्षेत्रीय भाषाओं में अब भी बड़ी चुनौती

हालांकि स्मार्टफोन गांवों तक पहुंच चुका है, लेकिन ग्रामीण भारत में अब भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। कई इलाकों में इंटरनेट की गुणवत्ता कमजोर है और पहली बार इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों को पर्याप्त डिजिटल प्रशिक्षण नहीं मिल पाता।

भाषा भी एक बड़ी समस्या है। इंटरनेट पर मौजूद बड़ी मात्रा में जानकारी और साइबर सुरक्षा से जुड़ी सामग्री अब भी अंग्रेजी में होती है। इससे क्षेत्रीय भाषाएं बोलने वाले लोगों के लिए डिजिटल दुनिया को पूरी तरह समझना मुश्किल हो जाता है।

कई ग्रामीण परिवारों में महिलाओं की डिजिटल पहुंच भी सीमित रहती है। कई जगह मोबाइल फोन का इस्तेमाल घर के पुरुष सदस्य नियंत्रित करते हैं। इससे महिलाओं और लड़कियों की डिजिटल स्वतंत्रता प्रभावित होती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत का डिजिटल भविष्य तभी सफल होगा जब डिजिटल शिक्षा समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचेगी।

मनोरंजन बढ़ रहा है, लेकिन डिजिटल कौशल नहीं

आज एक बड़ी चिंता यह भी है कि इंटरनेट का इस्तेमाल डिजिटल कौशल से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है।

युवा कई घंटे ऑनलाइन बिताते हैं, लेकिन उनका अधिकांश समय रील्स, गेमिंग और मनोरंजन आधारित कंटेंट में चला जाता है। दूसरी तरफ कोडिंग, साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन रिसर्च, AI टूल्स और प्रोफेशनल डिजिटल स्किल्स अब भी सीमित लोगों तक ही पहुंची हैं।

आने वाले समय में यह अंतर और गंभीर हो सकता है क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन दुनिया भर में नौकरियों और काम करने के तरीकों को बदल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की नौकरियां डिजिटल क्षमता पर ज्यादा निर्भर होंगी। जिन लोगों के पास जरूरी डिजिटल कौशल नहीं होंगे, उनके लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो सकता है।

डिजिटल जागरूकता अब एक जरूरी जीवन कौशल बन चुकी है

आज के दौर में डिजिटल जागरूकता कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि एक जरूरी जीवन कौशल बन चुकी है। लोगों को ऑनलाइन सुरक्षा, डिजिटल पेमेंट, प्राइवेसी सेटिंग्स और जिम्मेदार इंटरनेट इस्तेमाल के बारे में जानकारी होना जरूरी है।

माता-पिता को भी बच्चों को स्क्रीन एडिक्शन, साइबर बुलिंग और ऑनलाइन गलत जानकारी के खतरों के बारे में समझाना होगा।

स्कूल, कॉलेज और स्थानीय समुदाय आने वाले वर्षों में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल शिक्षा केवल मोबाइल चलाना सिखाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों को जिम्मेदार और जागरूक डिजिटल नागरिक बनाना भी जरूरी है।

भारत करोड़ों लोगों को ऑनलाइन लाने में सफल रहा है। अब अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि लोग डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल सुरक्षित, समझदारी और सही तरीके से कर सकें।

देश का डिजिटल भविष्य केवल तेज इंटरनेट और सस्ते स्मार्टफोन पर निर्भर नहीं करेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले वर्षों में भारत के नागरिक कितने जागरूक, जिम्मेदार और डिजिटल रूप से तैयार बन पाते हैं।

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