हर साल 22 अप्रैल को हम अर्थ डे मनाते हैं। लेकिन क्या सिर्फ एक दिन धरती को याद कर लेना काफी है? क्या हमें अपने इस सुंदर ग्रह को बचाने की ज़िम्मेदारी हर दिन नहीं निभानी चाहिए?
2025 की थीम है – “प्लैनेट वर्सेस प्लास्टिक” यानी धरती बनाम प्लास्टिक। यह थीम एक सीधी और सच्ची बात कहती है—अगर हमने अब भी प्लास्टिक पर रोक नहीं लगाई, तो आने वाले वक्त में यह ज़हर हमारी हवा, पानी और शरीर तक पहुंच जाएगा।
क्यों ज़रूरी है अर्थ डे?
पिछले कुछ दशकों में हमने बहुत कुछ खोया है—बर्फीले पहाड़ पिघल रहे हैं, जंगल सिमट रहे हैं, जानवर गायब हो रहे हैं, और मौसम की मार रोज़ ज़िंदगी को कठिन बना रही है।
हम सोचते हैं कि यह सब सरकारों का काम है। लेकिन सच ये है—धरती हम सभी की है, और हर छोटा कदम मायने रखता है।
क्या कर सकते हैं हम?
- प्लास्टिक बैग्स छोड़ें, कपड़े या जूट के थैलों को अपनाएं।
- प्लास्टिक की बोतलों से बचें, स्टील या तांबे की बोतलें साथ रखें।
- जरूरत से ज़्यादा चीज़ें न खरीदें, हर चीज़ का दोबारा इस्तेमाल करें।
- पेड़ लगाएं, और बच्चों को भी पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करें।
- बिजली, पानी और कागज़ की बचत को आदत बनाएं।
छोटे कदम, लेकिन असर बड़ा होगा।
बच्चों और युवाओं की भागीदारी
स्कूलों में आज साफ़-सफ़ाई अभियान, पोस्टर मेकिंग और पर्यावरण गीतों के कार्यक्रम हुए। बच्चों ने अपने घरों में प्लास्टिक बंद करने की शपथ ली। सोशल मीडिया पर युवाओं ने “#EarthDay2025” के ज़रिए कई रचनात्मक पोस्ट शेयर कीं।
एक प्रेरणादायक संदेश
“हम धरती को पूर्वजों से नहीं, अपने बच्चों से उधार लेते हैं।”
अगर हमें अपने आने वाले कल को सुरक्षित रखना है, तो हमें आज ही बदलना होगा।
धरती को बचाना कोई मुश्किल काम नहीं, बस हमारी सोच और आदतों का थोड़ा सा बदलाव चाहिए।
तो आइए, इस बार अर्थ डे को सिर्फ एक तारीख न बनने दें, इसे एक नई शुरुआत बनाएं—अपने और आने वाली पीढ़ियों के लिए।


