भारत ने फ्रांस के साथ एक बड़ा डिफेंस सौदा फाइनल कर लिया है। करीब 64,000 करोड़ रुपये की डील के तहत भारतीय नौसेना को 26 Rafale-M फाइटर जेट मिलेंगे। ये वही जहाज हैं जो समंदर के बीच एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ सकते हैं और दुश्मन को दूर से ही निशाना बना सकते हैं।
लेकिन ये डील सिर्फ जहाज खरीदने तक सीमित नहीं है। इसमें ट्रेनिंग, हथियार, सिम्युलेटर और देश में मैन्युफैक्चरिंग का सिस्टम खड़ा करने जैसी कई चीजें शामिल हैं।
क्या है इस डील में?
इस डील में फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी से 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर Rafale-M विमान मिलेंगे। ये खासतौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये फाइटर जेट मुख्य रूप से आईएनएस विक्रांत से उड़ेंगे, और ज़रूरत पड़ी तो आईएनएस विक्रमादित्य पर भी इस्तेमाल हो सकते हैं।
अभी तक नेवी के पास रूसी MiG-29K फाइटर हैं, जिनकी परफॉर्मेंस और सर्विस को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में Rafale-M को एक मजबूत अपग्रेड माना जा रहा है।
इनकी डिलीवरी 2028 से शुरू होगी, और नेवी के पायलट्स को फ्रांस और भारत, दोनों जगह ट्रेनिंग दी जाएगी।
Rafale-M को खास क्या बनाता है?
Rafale-M कोई आम लड़ाकू विमान नहीं है। ये समुद्री ऑपरेशन में पूरी तरह से आज़माया जा चुका है और फ्रेंच नेवी इसका लंबे वक्त से इस्तेमाल कर रही है। अब ये विमान हिंद महासागर में भारत की ताकत बनने जा रहे हैं।
ये वही Rafale टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं जो पहले से भारतीय वायुसेना के पास है। मतलब ट्रेनिंग, रख-रखाव और ऑपरेशन में कई चीजें समान रहेंगी, इससे लॉजिस्टिक और कोऑर्डिनेशन आसान हो जाएगा।
सिर्फ जहाज नहीं, ज़मीन पर भी तैयारी
ये सौदा सिर्फ एयरक्राफ्ट का नहीं है। इसमें 5 साल की परफॉर्मेंस बेस्ड सर्विसिंग, हथियारों का पैकेज, और पायलट्स व टेक्नीशियंस के लिए ट्रेनिंग सिम्युलेटर भी शामिल हैं।
सबसे बड़ी बात, इसमें ‘मेक इन इंडिया’ का एंगल भी शामिल है। फ्रांस भारत में Rafale के पार्ट्स जैसे फ्यूसलाज बनाने की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगा। इसके अलावा इंजन, सेंसर और हथियारों की मरम्मत और सर्विसिंग के लिए ‘MRO’ (Maintenance, Repair & Overhaul) सिस्टम भारत में बनेगा।
इससे देश में नौकरियां बढ़ेंगी, स्किल्स डेवलप होंगे और हम विदेशी सप्लायर्स पर कम निर्भर होंगे।
हिंद महासागर में भारत की मजबूत पकड़
सीधी बात करें, ये सिर्फ फाइटर प्लेन खरीदने की बात नहीं है। ये रणनीतिक कदम है। हिंद महासागर धीरे-धीरे बड़ी ताक़तों का गेम ज़ोन बन रहा है। ऐसे में समुद्र में ताकतवर एयरक्राफ्ट ऑपरेशन भारत को एक अलग ही मजबूती देते हैं।
कुछ जानकारों का मानना है कि इस डील के बाद भारतीय नेवी फिर से तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की मांग उठा सकती है। जब हमारे पास ज़्यादा फाइटर होंगे, तो उन्हें उड़ाने के लिए ज़्यादा कैरियर भी चाहिए होंगे।
भारत-फ्रांस डिफेंस पार्टनरशिप में नया मोड़
Rafale-M डील, भारत और फ्रांस के बीच पहले से चली आ रही डिफेंस पार्टनरशिप को और गहरा करती है। इससे ये भी साफ होता है कि दोनों देशों के बीच भरोसा है और दोनों बड़े फैसले लेने को तैयार हैं।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस के डिफेंस मिनिस्टर सेबेस्टियन लेकोर्नू ने इस समझौते को कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद फाइनल किया। दोनों देशों के अधिकारी समझौते की कॉपियां और हथियार सप्लाई प्रोटोकॉल भी आपस में एक्सचेंज कर चुके हैं।
ये सिर्फ सौदा नहीं, भविष्य की तैयारी है
Rafale-M भारत के लिए एक फाइटर जेट से कहीं ज़्यादा है। ये दिखाता है कि देश समुद्र में भी अपनी ताकत को मज़बूत करने के लिए तैयार है।
जब चीन अपनी नेवी को तेज़ी से बढ़ा रहा है और समुद्री इलाकों में टेंशन बढ़ रही है, तब भारत का ये निवेश सही समय पर लिया गया एक स्मार्ट फैसला माना जा रहा है।
अब जब Rafale-M हमारे कैरियर्स पर तैनात होंगे, तो दुनिया को भी एक साफ संदेश जाएगा, भारत तैयार है, और अपने पानी की हिफाज़त करना जानता है।


