जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले के बाद भारत अब पाकिस्तान को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद पर नकेल कसने की कोशिश में जुट गया है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से अपील करने की तैयारी कर रही है कि वे पाकिस्तान को दी जा रही वित्तीय सहायता की दोबारा समीक्षा करें। भारत का कहना है कि इस्लामाबाद आतंकवाद को समर्थन देता है और ऐसे में उसे बिना सख्त शर्तों के आर्थिक मदद देना खतरनाक हो सकता है।
बता दें, IMF ने मार्च 2025 में पाकिस्तान को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 1.3 अरब डॉलर का नया कर्ज दिया था। अब 9 मई को IMF की कार्यकारी बोर्ड की बैठक में पाकिस्तान के साथ पहले से मिले पैकेज और नए प्रस्ताव की समीक्षा होनी है।
भारत का साफ कहना है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ हमला, जिसमें कई निर्दोष लोग मारे गए, एक गंभीर चेतावनी है। यह 2008 के मुंबई हमलों के बाद का सबसे घातक हमला माना जा रहा है। भारत की नजर में पाकिस्तान की आतंक समर्थक नीतियों को अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर करने की जरूरत है।
ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के सौम्य भौमिक ने एक रिपोर्ट में लिखा है, “IMF को अपनी रणनीति में आतंकवाद के खिलाफ सख्त शर्तें जोड़नी होंगी, वरना ऐसी वित्तीय मदद से क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।”
गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पिछले साल IMF ने उसे 7 अरब डॉलर की राहत दी थी। इसके अलावा वर्ल्ड बैंक ने भी जनवरी 2025 में पाकिस्तान को 20 अरब डॉलर का बड़ा पैकेज मंज़ूर किया था।
अब भारत चाहता है कि यह फंडिंग रोकी जाए या सख्त निगरानी में दी जाए।
भारत FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) से भी अपील करने की योजना में है कि वह पाकिस्तान को फिर से ग्रे लिस्ट में डाले, जिससे उसकी आर्थिक गतिविधियों पर और निगरानी रखी जा सके।
अगर ऐसा हुआ, तो पहले से ही लड़खड़ाती पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को जबरदस्त झटका लग सकता है।
भारत का संदेश साफ है – आतंकवाद के समर्थन करने वालों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, और वित्तीय जवाबदेही लागू की जाएगी।


