पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद कश्मीर का पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
जिस जगह पर सिर्फ शांति, हरियाली और नदी की कल-कल सुनाई देती थी, वहां अब खामोशी और दहशत है। 26 लोगों की मौत और कई घायल। इतना ही काफी था कि हजारों सैलानियों ने अपने प्लान रद्द कर दिए।
फिर से चहक रहा था पर्यटन
पहलगाम में बीते कुछ महीनों से अच्छी चहल-पहल थी। टूरिस्टों की संख्या बढ़ रही थी, होटल फुल हो रहे थे, और लोकल दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट रही थी।
घोड़े वाले, चायवाले, गाइड – सबके लिए काम फिर से शुरू हुआ था। कोरोना और पहले के तनावों के बाद, ये एक नई उम्मीद थी।
एक रात में सब बदल गया
हमले के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया। डर फैल गया।
24 घंटे के अंदर हज़ारों बुकिंग्स कैंसिल हो गईं। खासकर परिवार, बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ आने वाले लोग अब सफर करने से घबरा रहे हैं।
श्रीनगर के एक टूर ऑपरेटर ने कहा, “हम सोचे थे अच्छे दिन आ गए हैं… अब सब फिर से वहीं पहुंच गया।”
व्यापार पर संकट
कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन एक अहम भूमिका निभाता है। होटल कर्मचारी, टैक्सी ड्राइवर, दुकानदार, कारीगर – सभी की आमदनी इसी पर टिकी है।
पहलगाम के एक होटल मैनेजर बोले, “इस एक हमले ने महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। अब आगे क्या होगा, समझ नहीं आ रहा।”
सरकार की नई एडवाइजरी
हमले के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नये दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सुरक्षा बढ़ा दी गई है – गुलमर्ग, सोनमर्ग, श्रीनगर जैसे प्रमुख पर्यटक इलाकों में चेकिंग कड़ी कर दी गई है।
फिर भी, सैलानी अब हिमाचल या उत्तराखंड जैसे विकल्पों की ओर देख रहे हैं। डर अब भी बना हुआ है।
स्थानीय लोगों की अपील
कश्मीर के कई स्थानीय लोग अब सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। वे देशवासियों से अपील कर रहे हैं कि एक घटना से पूरे कश्मीर को मत आंकिए।
एक वायरल वीडियो में एक स्थानीय युवक कहता है, “हम मेहमानों को दिल से अपनाते हैं। डरो मत, फिर आइए।”पर्यटन विभाग अब फिर से विश्वास जगाने के लिए कैंपेन की तैयारी कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि सैलानियों का भरोसा लौटने में वक्त लगेगा – हफ्ते, शायद महीने भी।
फिर भी, घाटी के लोग हिम्मत नहीं हार रहे।
पहलगाम के एक चाय वाले ने कहा, “हमने इससे बड़े तूफान देखे हैं। ये भी गुजर जाएगा।”


