मुंबई के युवा एक बार फिर एक ऐसे सांस्कृतिक महोत्सव की आहट महसूस कर रहे हैं, जिसका नाम ही अपने आप में एक पहचान बन चुका है, और वह है St. Xavier’s College का ‘मल्हार’ महोत्सव। हर वर्ष की तरह इस बार भी अगस्त में आयोजित होने वाला यह प्रतिष्ठित महोत्सव अपने साथ ऊर्जा और युवा जोश का संगम लेकर आने वाला है। अभी से ही इसकी उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और शहर में एक अनकही उत्सुकता साफ महसूस की जा सकती है।
सन् १९७९ में अपनी शुरुआत से लेकर आज तक, मल्हार देश के सबसे प्रतिष्ठित अंतर-महाविद्यालयीय सांस्कृतिक महोत्सवों में से एक रहा है। देशभर के सैकड़ों महाविद्यालयों से हर वर्ष १५,००० से अधिक दर्शक और प्रतिभागी यहाँ जुटते हैं। साहित्यिक कलाएँ, रंगमंच, संगीत, नृत्य और खेल, यानी हर क्षेत्र में फैले इसके आयोजन इसे युवा अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा उत्सव बनाते हैं।
मल्हार की विशेष पहचान उसके ‘कॉनक्लेव’ सत्र में भी झलकती है। पूर्व वर्ष में Supriya Sule, Aditya Roy Kapur और माननीय न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व इसमें शामिल हुए। वहीं, पैरा एथलीट और स्वर्ण पदक विजेता भाग्यश्री जाधव ने युवाओं को अपनी संघर्षमय यात्रा से प्रेरित किया और ‘बेन्ने दोसा’ के संस्थापक अखिल अय्यर व श्रिया नारायण ने उद्यमिता पर अपने विचार व्यक्त किए।
इसके साथ ही, ‘मल्हार बाय द बे’ जैसे पूर्व-आयोजन शहर में पहले ही उत्सव का माहौल बना देते हैं। विशेष रूप से ‘यार्ड सेल’ समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। वर्षों से यह मल्हार महोत्सव की पहचान का अहम हिस्सा बना हुआ है।
अब जब मल्हार २०२६ की तैयारियाँ रफ्तार पकड़ रही हैं, तो प्रश्न यही है कि इस बार क्या नया होगा? नए संवाद सत्र, नए चेहरे, नई प्रस्तुतियाँ और वह माहौल, जो केवल मल्हार ही दे सकता है।
यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक अनुभव और एक परंपरा है। युवाओं की रचनात्मकता, ऊर्जा और सपनों का उत्सव, जो एक बार फिर अगस्त में मुंबई की धड़कन बनने के लिए तैयार है।
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