अगर आप भी मुंबई में अपना खुद का घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। MHADA यानी महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डिवेलपमेंट अथॉरिटी अब घरों की कीमतें कम करने पर काम कर रही है।
असल में, MHADA ने एक नई तीन-सदस्यीय कमेटी बना दी है, जो घरों की कीमत तय करने वाले फार्मूले पर दोबारा नजर डालेगी। मकसद एकदम साफ है — आम लोगों को सस्ते घर मिले और संस्था को भी कोई घाटा ना हो।
अब कैसे तय होती हैं कीमतें?
अभी MHADA जिन कीमतों पर घर बेचता है, वो ज़मीन की लागत, निर्माण का खर्च और सेटअप की लागत के आधार पर होती हैं। लेकिन बात सिर्फ इतनी नहीं है। अगर कोई ज़मीन 10-12 साल पहले खरीदी गई थी, और तब से उस पर खर्च होता आ रहा है, तो वो सारा खर्च भी घर की कीमत में जुड़ जाता है। अब सोचिए, नुकसान किसका? आम आदमी का।
MHADA के एक सीनियर अफसर का साफ कहना है कि अगर किसी प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो उसकी सज़ा जनता को क्यों दी जाए? यही सवाल अब कमेटी देखेगी।

नई सोच: आकार नहीं, कीमत देखी जाएगी
MHADA अभी तक घरों को आय वर्ग के हिसाब से बांटती है —
- 300 वर्ग फुट तक: सबसे कम आय वर्ग
- 450 वर्ग फुट तक: कम आय वर्ग
- 600 वर्ग फुट तक: मिडिल क्लास
- 900 वर्ग फुट तक: हाई इनकम ग्रुप
लेकिन अब बात यहां भी बदल सकती है। अधिकारी यह भी सोच रहे हैं कि क्या घर का वर्ग फुट नहीं बल्कि उसकी कीमत देखकर तय किया जाए कि वो किस आय वर्ग के लिए है?
जैसे कि साउथ मुंबई और उपनगरों में एक ही साइज के घर की कीमत में जमीन-आसमान का फर्क होता है। ऐसे में सिर्फ साइज के आधार पर वर्ग तय करना शायद अब ठीक नहीं रहेगा।
क्या होगा आगे?
कमेटी को तीन महीने में रिपोर्ट बनानी है। इसके बाद ये रिपोर्ट MHADA के उपाध्यक्ष को जाएगी और फिर महाराष्ट्र सरकार से मंजूरी ली जाएगी।
अगर सब सही रहा, तो आने वाले वक्त में मुंबई में घर लेना आम आदमी के लिए आसान हो जाएगा।


