मदर्स डे के मौके पर जहां लोग मां के प्यार, त्याग और ममता को याद कर रहे हैं, वहीं Miyam Charitable Trust समाज सेवा के जरिए मातृत्व की एक नई परिभाषा पेश कर रहा है। ट्रस्ट की संस्थापक Neetu Joshi ने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि मातृत्व केवल परिवार तक सीमित भावना नहीं, बल्कि समाज के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचने वाली संवेदना है।

मियाम ट्रस्ट आज स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे कई क्षेत्रों में लगातार काम कर रहा है। खासतौर पर गडचिरोली में चल रही इसकी “हरियाली का संकल्प – प्रकृति और प्रगति के साथ” पहल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यह अभियान न केवल पर्यावरण को बचाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के जीवन में रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई रोशनी भी लेकर आया है।

इस परियोजना को Surjagud Ispat Private Limited के सहयोग से गडचिरोली में शुरू किया गया है। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैली इस विशाल नर्सरी में 5 लाख पौधे तैयार करने की क्षमता विकसित की जा रही है। यहां बड़ी संख्या में पौधों का उत्पादन किया जाएगा, जो आने वाले समय में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

लेकिन इस पहल की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ पौधे नहीं, बल्कि उससे जुड़ी महिलाएं हैं। इस परियोजना ने अब तक 200 से अधिक ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है। जिन महिलाओं के पास पहले आय का कोई स्थायी साधन नहीं था, वे आज नर्सरी प्रबंधन और पौधों की देखभाल जैसे कामों में प्रशिक्षित होकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

महिलाओं को बीज रोपण, पौधों की सिंचाई, कम्पोस्ट तैयार करना और नर्सरी संचालन जैसी तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। कई महिलाएं अब अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभाने में भी योगदान दे रही हैं।

2020 में स्थापित मियाम चैरिटेबल ट्रस्ट ने कम समय में समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। ट्रस्ट जरूरतमंद लोगों के इलाज, भोजन वितरण, ग्रामीण सहायता और पशु-पक्षियों की सेवा जैसे कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

नीतू जोशी का मानना है कि पेड़ केवल प्रकृति को हरा-भरा नहीं बनाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव भी रखते हैं। उनका कहना है कि यदि पर्यावरण संरक्षण को रोजगार और महिला सशक्तिकरण से जोड़ दिया जाए, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

गडचिरोली जैसे आदिवासी क्षेत्र में यह पहल आज कई परिवारों के लिए सम्मानजनक जीवन का आधार बन चुकी है। जहां एक तरफ पौधों से हरियाली बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता और उम्मीद के नए बीज भी बोए जा रहे हैं।

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