जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार, 28 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी। विधानसभा ने गहरा दुख जताते हुए संकल्प लिया कि सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने और प्रदेश की तरक्की में बाधा डालने की किसी भी साजिश को नाकाम किया जाएगा। सदन में शहीदों की श्रद्धांजलि के रूप में दो मिनट का मौन भी रखा गया।
इसी बीच, राजनीति में भी हलचल दिखी। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने खुद स्वीकार किया कि अपने कार्यकाल के दौरान कई मामलों में वह असफल रहे, जो इस तनावपूर्ण माहौल में एक दुर्लभ आत्ममंथन भरा बयान रहा।
उधर, केंद्र सरकार ने इस आतंकी घटना से जुड़े झूठे और भड़काऊ प्रचार पर सख्ती दिखाई है। गृह मंत्रालय की सिफारिश पर 16 पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार का कहना है कि ये चैनल भारत, भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ भ्रामक और साम्प्रदायिक नफरत फैलाने वाला कंटेंट परोस रहे थे, ताकि पहलगाम हमले के बाद माहौल बिगाड़ा जा सके।
इसके साथ ही केंद्र ने बीबीसी इंडिया प्रमुख जैकी मार्टिन को भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ने बीबीसी की रिपोर्टिंग को असंवेदनशील और तथ्यों से परे बताया है, जिस पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई गई है।
हमले के बाद कश्मीरियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री ने केंद्र से अपील की है कि प्रदेश से बाहर रहने या यात्रा कर रहे कश्मीरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और भलाई का पूरा ध्यान रखा जाए।
रविवार, 27 अप्रैल 2025 को कश्मीर में एक और मुद्दा गरमा गया। सुरक्षा बलों ने आतंकियों से जुड़े दस मकानों को नियंत्रित धमाकों के जरिये ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई पर कई क्षेत्रीय दलों ने विरोध जताया है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लंबी अवधि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था।
फिलहाल, हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन शांति बहाल करने के साथ-साथ इस हमले के पीछे की गहरी चुनौतियों से निपटने में जुटा है।


