भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए सुनियोजित आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे।
पाकिस्तान के दूत को बुलाया गया
भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक साद अहमद वरैच को दिल्ली बुलाकर उन्हें ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ नोटिस सौंपा है। इसका मतलब है कि पाकिस्तानी सैन्य राजनयिकों को भारत छोड़ना होगा। यह कदम भारत द्वारा घोषित कई सख्त कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद उठाया गया है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई बड़े फैसले लिए हैं:
- सिंधु जल संधि को निलंबित किया
- अटारी बॉर्डर को अस्थायी रूप से बंद किया
- राजनयिक संबंधों को निचले स्तर पर लाया
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में बैठक
23 अप्रैल को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें ये फैसले लिए गए। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे।
हमले का समय
यह हमला 22 अप्रैल को पहलगाम के खूबसूरत बैसारन मीडो इलाके में हुआ। यह वही दिन था जब:
- अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत में थे
- प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे
हमले की खबर मिलते ही पीएम मोदी ने अपना दौरा छोटा कर दिया और अगली सुबह दिल्ली लौट आए।
पाकिस्तान का इनकार
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस हमले में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है। उन्होंने 23 अप्रैल को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, “पाकिस्तान का इससे कोई लेना-देना नहीं है।”
हमले में किसका हाथ?
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह हमला ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने किया हो सकता है, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है। कुछ रिपोर्ट्स में लश्कर के एक शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह कसूरी (उर्फ खालिद) को इस हमले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
भारत के इन कदमों के जवाब में पाकिस्तान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) की बैठक बुलाई है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, यह बैठक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में गुरुवार को होगी।


