कुछ समय पहले तक दिल की बीमारियाँ और हार्ट अटैक को उम्रदराज़ लोगों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब ये स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है। आज 20 से 40 वर्ष के बीच के युवाओं में भी अचानक मौत की घटनाएँ सामने आ रही हैं, और इनकी सबसे बड़ी वजह बन रही है – सडन कार्डियक अरेस्ट यानी अचानक हृदय की धड़कन का रुक जाना। दुखद बात यह है कि कई बार यह किसी भी प्रकार का लक्षण दिए बिना ही जानलेवा साबित होता है।हाल ही में कई बार आपने सुना होगा – “जिम में वर्कआउट करते समय युवक गिर पड़ा”, “स्टेज पर बोलते हुए अचानक मौत”, या “शादी में डांस करते हुए दिल का दौरा पड़ा”। ऐसी ही कई घटनाएं सामने आई हैं, और हाल ही में पता चला कि कांटा लगा गर्ल शेफाली जरीवाला की अचानक मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट था, और उससे पहले, उसके दोस्त सिद्धार्थ की मौत का कारण भी कार्डियक अरेस्ट था। इस तरह की खबरें रोजाना आती हैं।
ऐसे मामले अब इतने आम हो चुके हैं कि समाचार चैनलों से लेकर सोशल मीडिया तक हर हफ्ते किसी युवा की “अचानक मृत्यु” की खबर ट्रेंड करने लगती है। कोई जिम में वर्कआउट कर रहा होता है, कोई डांस कर रहा होता है या ऑफिस में मीटिंग ले रहा होता है – और अचानक गिरकर बेहोश हो जाता है, जहाँ कुछ मिनटों में ही उसकी जान चली जाती है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या वजह है कि हमारा दिल, जो आमतौर पर सालों तक बिना रूके काम करता है, आजकल इतनी कम उम्र में हार मान रहा है?
कार्डियक अरेस्ट, दरअसल, एक इलेक्ट्रिकल समस्या है जो दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाली प्रणाली में गड़बड़ी से उत्पन्न होती है। इससे दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है और रक्त संचार रुक जाता है। यदि कुछ ही मिनटों में इलाज न मिले तो यह स्थिति घातक बन जाती है। यह हार्ट अटैक से अलग है, जो आमतौर पर दिल की नसों में ब्लॉकेज के कारण होता है। हालांकि दोनों एक-दूसरे से जुड़ी स्थितियाँ हो सकती हैं।
अब बात करें असली मुद्दे की – तो आज के युवा कार्डियक अरेस्ट के खतरे की चपेट में क्यों आते जा रहे हैं। इसका सबसे पहला और बड़ा कारण है जीवनशैली में बदलाव। आधुनिक जीवनशैली ने हमें सुविधा तो दी है, लेकिन शारीरिक सक्रियता छीन ली है। युवा अब ज़्यादातर समय स्क्रीन पर बिताते हैं – ऑफिस में बैठकर काम, फिर मोबाइल पर स्क्रॉलिंग, और फिर देर रात तक वेब सीरीज़। नतीजा? फिजिकल एक्टिविटी लगभग ना के बराबर हो गई है। इसके साथ ही खानपान में जंक फूड, तले-भुने खाने, चीनी व नमक की अधिकता और बाहर का ऑर्डर किया हुआ प्रोसेस्ड खाना आम हो चुका है। ये सब मिलकर शरीर में मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ और हृदय की नसों में कोलेस्ट्रॉल जमने जैसे रोगों को जन्म देते हैं, जो अंततः कार्डियक अरेस्ट की वजह बनते हैं।
दूसरा कारण है मानसिक तनाव और ओवरवर्क। आज की पीढ़ी पर करियर, रिश्तों, सोशल मीडिया की तुलना, पढ़ाई, नौकरी की अनिश्चितता जैसे कई मानसिक दबाव हैं। लगातार तनाव में रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन जैसे कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट असामान्य हो जाता है। यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो दिल की मांसपेशियों पर असर पड़ता है और अचानक कार्डियक फेल्योर की संभावना बनती है। कई रिसर्च में पाया गया है कि जो लोग अत्यधिक स्ट्रेस में रहते हैं, उनमें अचानक दिल की धड़कन रुकने की आशंका सामान्य से लगभग दो गुना अधिक होती है।
तीसरा अहम कारण है बिना सलाह के अत्यधिक जिम वर्कआउट और स्टेरॉयड का सेवन। युवा वर्ग में फिटनेस को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अफसोस कि यह कई बार अति उत्साह में बदल जाती है। सोशल मीडिया पर बॉडी शेमिंग और ‘परफेक्ट फिजिक’ की दौड़ में युवा अक्सर बहुत भारी वेट उठाने लगते हैं, कभी-कभी बिना किसी मेडिकल फिटनेस टेस्ट या प्रोफेशनल ट्रेनर की निगरानी के। ऊपर से बॉडीबिल्डिंग के लिए बिना सलाह के सप्लिमेंट्स और स्टेरॉयड का सेवन दिल की सेहत को गहरे तक नुकसान पहुंचाता है। ये केमिकल हार्ट मसल्स को सख्त और कमजोर बनाते हैं, जिससे इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी डिस्टर्ब हो सकती है और कार्डियक अरेस्ट की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
एक और बड़ा कारक है कोविड-19 संक्रमण के बाद की जटिलताएँ। कोरोना वायरस सिर्फ फेफड़ों पर नहीं, दिल की मांसपेशियों पर भी असर डालता है। कोविड से ठीक हो चुके कई युवाओं में ‘Myocarditis’ यानी हृदय की मांसपेशियों में सूजन देखी गई है। ये सूजन कभी-कभी महीनों तक बनी रह सकती है और बिना लक्षण के मौजूद रहकर अचानक दिल की रफ्तार में गड़बड़ी ला सकती है। खासतौर पर अगर ऐसे लोग वर्कआउट या ज्यादा शारीरिक मेहनत करते हैं तो अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।
साथ ही परिवारिक इतिहास यानी जेनेटिक कारण भी एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। अगर परिवार में किसी को कम उम्र में दिल की बीमारी या अचानक मौत हुई हो तो अगली पीढ़ी को भी यह खतरा हो सकता है। लेकिन अफसोस, युवा इस ओर सतर्क नहीं होते और ‘मुझे कुछ नहीं होगा’ वाली सोच में जीते हैं। यही लापरवाही कभी-कभी जानलेवा साबित होती है।
तंबाकू, शराब और नशे के सेवन का चलन भी युवाओं में तेजी से बढ़ा है। यह आदतें न केवल हृदय की नसों को सिकोड़ती हैं बल्कि ब्लड प्रेशर को असंतुलित करती हैं और धमनियों में रक्त के बहाव को बाधित कर सकती हैं।
सबसे चिंताजनक बात ये है कि आने वाले वर्षों में यह खतरा और बढ़ने वाला है। भारत में हर साल लगभग 7 लाख कार्डियक अरेस्ट के मामले होते हैं और अब इनमें 30% से अधिक ऐसे युवा हैं जो किसी पूर्व बीमारी के बिना इस गंभीर स्थिति के शिकार हो रहे हैं। WHO और ICMR जैसी संस्थाओं की रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2030 तक भारत में हृदय रोगों से संबंधित मौतों में 40% हिस्सेदारी 30–45 वर्ष की आयु वालों की होगी।
इस भयावह स्थिति से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है समय पर सावधानी। युवाओं को चाहिए कि वे साल में कम से कम एक बार ECG, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर की जांच करवाएं। नींद पूरी लें, मानसिक तनाव को योग और ध्यान के माध्यम से कम करें और काम और जीवन के बीच संतुलन बनाए रखें। किसी भी प्रकार के एक्सरसाइज या जिम शुरू करने से पहले कार्डियक फिटनेस जांच अवश्य करवाएं। यदि किसी को सीने में दर्द, थकावट, सांस फूलना या हार्टबीट अनियमित लगे – तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इसके साथ ही CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) की ट्रेनिंग लेना आज समय की ज़रूरत है। क्योंकि यदि किसी को कार्डियक अरेस्ट होता है और आस-पास का व्यक्ति सही समय पर CPR दे सके – तो जान बच सकती है। स्कूलों, कॉलेजों और वर्कप्लेस पर CPR प्रशिक्षण को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, यह समय है जब युवाओं को जागरूक होना होगा कि एक बेहतर शरीर केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अंदर से भी स्वस्थ होना चाहिए। सफलता, करियर और सोशल मीडिया की चमक के बीच दिल की धड़कन का ख्याल रखना जरूरी है, वरना एक दिन यह अचानक खामोश हो सकता है। स्वास्थ्य की अनदेखी जीवन की सबसे बड़ी भूल बन सकती है। दिल हमारा सबसे वफादार अंग है – लेकिन अगर हम ही उसकी नहीं सुनेंगे तो वह भी एक दिन चुप हो जाएगा। कार्डियक अरेस्ट एक साइलेंट किलर है, लेकिन सही जानकारी, जागरूकता और जीवनशैली से इसे टाला जा सकता है।
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर
| विशेषता | कार्डियक अरेस्ट | हार्ट अटैक |
|---|---|---|
| कारण | दिल की इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी | कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज |
| प्रभाव | दिल की धड़कन रुक जाती है | दिल की मांसपेशी को नुकसान |
| चेतावनी संकेत | अक्सर कोई नहीं | सीने में दर्द, पसीना |
| परिणाम | मृत्यु कुछ मिनटों में | मृत्यु धीरे-धीरे हो सकती है |
तथ्य जो सोचने पर मजबूर करते हैं:
- भारत में हर साल 7 लाख से ज्यादा कार्डियक अरेस्ट केस होते हैं
- 40% पीड़ितों की उम्र 35 से कम होती है
- हर 4 में से 1 युवा को उच्च रक्तचाप की समस्या है
- 80% मौतें रोकथाम योग्य हैं अगर समय रहते कदम उठाए जाएं
याद रखें:
सक्सेस जरूरी है, लेकिन हेल्थ उससे भी जरूरी है। क्योंकि अगर दिल ही नहीं धड़का, तो कुछ भी नहीं बचेगा।


