बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांदिवली के ग्रोवेल्स 101 मॉल को तुरंत बंद करने का आदेश दिया है।
मॉल बिना पर्यावरणीय मंज़ूरी (एनवायरमेंटल क्लीयरेंस) के चलाया जा रहा था। कोर्ट ने इसे ‘बेहद गंभीर मामला’ करार दिया और महाराष्ट्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (MPCB) के बंदी आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।
बिना मंज़ूरी, बिजनेस नहीं चलेगा!
ग्रोवेल्स 101 मॉल का संचालन ग्रोअर एंड वेल (इंडिया) लिमिटेड कर रही थी, जिसने इस बंदी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस जितेंद्र जैन की बेंच ने कंपनी की दलीलें खारिज कर दीं। कोर्ट ने साफ कहा –
“अगर कोई कंपनी बिना ज़रूरी अनुमति के मॉल बनाकर चला रही है, तो यह खुद कानून अपने हाथ में लेने जैसा है। ऐसे गैर-कानूनी कामों को सही नहीं ठहराया जा सकता। इसलिए, इसे तुरंत बंद किया जाए!”
अभी आवेदन पेंडिंग है
कंपनी ने बचाव में कहा कि उसने 2016 में एक एमनेस्टी स्कीम के तहत पर्यावरणीय मंज़ूरी के लिए आवेदन दिया था, जो अभी पेंडिंग है। मगर कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया।
“कोई भी एमनेस्टी स्कीम यह अधिकार नहीं देती कि आप बिना मंज़ूरी के बिजनेस करते रहें।”
साथ ही, कोर्ट ने कंपनी के रवैये को लेकर भी सख्त टिप्पणी की –
“याचिकाकर्ता (कंपनी) ने पर्यावरणीय नियमों की परवाह ही नहीं की।”
नैचुरल जस्टिस का बहाना नहीं चलेगा
कंपनी के वकील अयुष अग्रवाल ने कोर्ट में दलील दी कि बंदी का आदेश ‘नेचुरल जस्टिस’ के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है’ और इतनी जल्दी कार्रवाई की ज़रूरत नहीं थी। लेकिन कोर्ट ने इसे भी खारिज कर दिया।
“MPCB को किसी पर्यावरणीय आपदा का इंतजार करने की ज़रूरत नहीं है। नियम टूटेंगे, तो कार्रवाई होगी!”
कानूनी रास्ते खुले हैं
कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी के पास जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत वैकल्पिक कानूनी रास्ते उपलब्ध थे, लेकिन उसने उनका इस्तेमाल नहीं किया।
कोर्ट ने सुनवाई के बाद साफ कर दिया कि बंदी आदेश पर कोई रोक नहीं लगेगी।
पर्यावरण नियमों की अनदेखी नहीं चलेगी
इस फैसले से एक सीधा संदेश गया है –
“पर्यावरण कानून कोई दिखावे के लिए नहीं बने हैं। बिजनेस का मतलब यह नहीं कि आप नियमों को ताक पर रखकर काम करते रहें।”
व्यवसायिक फायदे पर्यावरणीय नियमों से ऊपर नहीं हो सकते!


