आज की नई पीढ़ी यानी Gen Z और Millennials ज्वेलरी को सिर्फ सजावट का साधन नहीं मानती। उनके लिए यह उनकी पहचान, शैली और व्यक्तिगत कहानी बताने का तरीका भी है। यही वजह है कि पारंपरिक ब्रांडेड ज्वेलरी की बजाय कस्टम ज्वेलरी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

सबसे बड़ा कारण है पर्सनलाइजेशन। आज के युवा चाहते हैं कि उनकी ज्वेलरी बिल्कुल अलग और खास हो। किसी का पेंडेंट उसके नाम पर हो, कोई अंगूठी किसी खास तारीख को याद करे, या कोई डिज़ाइन किसी महत्वपूर्ण याद से जुड़ा हो। कस्टम ज्वेलरी उन्हें यह आज़ादी देती है कि वे मेटल, स्टोन और डिजाइन को अपनी पसंद के अनुसार चुन सकें। इससे हर पीस व्यक्तिगत और यादगार बन जाता है।

दूसरा बड़ा कारण है अपनी अलग पहचान बनाना। ब्रांडेड ज्वेलरी अक्सर बड़े पैमाने पर बनाई जाती है, इसलिए वही डिज़ाइन कई लोगों के पास होता है। लेकिन कस्टम ज्वेलरी हर व्यक्ति के लिए यूनिक होती है। यह पहनने वाले की पर्सनालिटी और स्टाइल को दर्शाती है। नई पीढ़ी भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपनी अलग पहचान बनाना पसंद करती है, और कस्टम ज्वेलरी उन्हें यही सुविधा देती है।

सोशल मीडिया का प्रभाव भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहा है। इंस्टाग्राम, पिनटेरेस्ट और अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग नए-नए डिज़ाइन देखकर प्रेरित होते हैं। कई इन्फ्लुएंसर्स और सेलेब्रिटी भी कस्टम पीस पहनते हैं। यह युवा दर्शकों में अपने लिए कुछ अनोखा बनवाने की चाह को और मजबूत करता है।

आजकल मिनिमलिस्ट डिज़ाइन भी काफी लोकप्रिय हो रहा है। भारी और चमकदार गहनों की जगह हल्के, सादे और क्लीन डिज़ाइन पसंद किए जा रहे हैं। कस्टम ज्वेलरी इस ट्रेंड के अनुसार सिंपल और एलिगेंट पीस तैयार करने की सुविधा देती है, जिसे रोजमर्रा में भी आसानी से पहना जा सकता है।

कुल मिलाकर, Gen Z और Millennials के लिए ज्वेलरी केवल फैशन का प्रतीक नहीं, बल्कि एक पर्सनल स्टेटमेंट है। वे ऐसे गहने चाहते हैं जो उनकी कहानी, व्यक्तित्व और पहचान को दिखाएं। यही कारण है कि कस्टम ज्वेलरी आज की नई पीढ़ी की पहली पसंद बनती जा रही है।

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