गुढी पाडवा कब है?
गुढी पाडवा 30 मार्च 2025, रविवार को मनाया जाएगा। यह महाराष्ट्र में खासतौर पर मनाया जाने वाला पर्व है, जो हिंदू नववर्ष की शुरुआत और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।
गुढी पाडवा क्यों मनाते हैं?
इस त्योहार के पीछे कई मान्यताएं हैं:
- कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि की रचना की थी।
- यह दिन भगवान राम की अयोध्या वापसी का भी प्रतीक माना जाता है, जब उन्होंने रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी।
- मराठा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी अपनी जीत के जश्न के रूप में गुढी उठाने की परंपरा शुरू की थी।
गुढी का महत्व क्या है?
गुढी एक बांस की छड़ी होती है, जिस पर चमकदार रेशमी कपड़ा, नीम के पत्ते, फूल और शक्कर की माला सजाई जाती है। इसके ऊपर तांबे या चांदी का कलश रखा जाता है। इसे घर के बाहर लगाने से सुख, समृद्धि और बुरी शक्तियों से बचाव होता है।
कैसे मनाते हैं गुढी पाडवा?
- स्नान और पूजा के बाद घर को फूलों और रंगोली से सजाया जाता है।
- गुढी को घर के बाहर लगाया जाता है और पूजा की जाती है।
- नीम और गुड़ का प्रसाद खाया जाता है, जो जीवन के मीठे-तीखे अनुभवों को दर्शाता है।
गुढी पाडवा 2025 के खास विवरण
- त्योहार की तिथि: 30 मार्च 2025, रविवार
- तिथि का समय: 29 मार्च 2025, शाम 4:27 बजे से 30 मार्च 2025, दोपहर 12:49 बजे तक
गुढी पाडवा सिर्फ नए साल की शुरुआत नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का जश्न भी है। इसे पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाएं और खुशहाल साल की कामना करें!


