अगर आपने कभी तत्काल टिकट बुक करने की कोशिश की है, तो आप इस परेशानी  को अच्छी तरह जानते हैं। सुबह ठीक दस बजे स्क्रीन पर आंखें गड़ाए बैठे रहना, पेमेंट के आखिरी स्टेप पर वेबसाइट का अटक जाना, और फिर वो मैसेज आना कि टिकट उपलब्ध नहीं है। यह अनुभव लाखों भारतीय यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। लेकिन अब IRCTC ने इस समस्या को जड़ से सुलझाने की कोशिश की है।

15 जुलाई से IRCTC ने पूरी तरह बदली हुई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि इस बदलाव की शुरुआत कहीं और से नहीं, बल्कि आम यात्रियों की शिकायत से हुई। राजस्थान में एक कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों  ने पुरानी IRCTC वेबसाइट में आने वाली दिक्कतों की बात रखी थी, जिसके बाद रेल मंत्रालय ने इस नई वेबसाइट के रोलआउट का ऐलान किया।

अब एक मिनट में डेढ़ लाख बुकिंग संभव

नई वेबसाइट की सबसे बड़ी खासियत है इसकी बढ़ी हुई क्षमता। पुरानी वेबसाइट हर मिनट सिर्फ करीब 32,000 टिकट बुकिंग ही संभाल पाती थी। नई वेबसाइट इसे बढ़ाकर 1.5 लाख बुकिंग प्रति मिनट तक ले गई है, यानी क्षमता में करीब पांच गुना इजाफा। मतलब पीक आवर्स में जो सर्वर कंजेशन की समस्या होती थी, वो अब काफी हद तक कम हो जाएगी।

सिर्फ बुकिंग ही नहीं, बल्कि टिकट से जुड़ी जानकारी खोजने वाला सिस्टम भी अपग्रेड हुआ है। Passenger Reservation System अब हर मिनट 40 लाख तक enquiries हैंडल कर सकता है, जबकि पहले यह क्षमता सिर्फ 4 लाख के आसपास थी। यह बदलाव खासतौर पर तत्काल बुकिंग के समय बहुत मायने रखता है, जब तत्काल विंडो खुलते ही भारी ट्रैफिक की वजह से वेबसाइट धीमी पड़ जाती थी या बुकिंग फेल हो जाती थी।

इंटरफेस भी हुआ आसान

सिर्फ स्पीड ही नहीं, वेबसाइट का लुक और फील भी पूरी तरह बदल दिया गया है। नया इंटरफेस पहले से कहीं ज्यादा साफ-सुथरा और सिंपल है, जिससे ट्रेन सर्च करना, टिकट बुक करना और वेबसाइट पर नेविगेट करना आसान हो गया है।

एक और राहत की बात यह है कि अब CAPTCHA के चक्करों में कम समय जाया करना पड़ेगा। पहले बार-बार वेरिफिकेशन स्टेप्स से गुजरना पड़ता था, जिससे बुकिंग की प्रोसेस धीमी हो जाती थी। इस स्टेप्स को घटाया गया है, ताकि यात्री जल्दी और आराम से अपना टिकट बुक कर सकें।

अब खुद चुन सकेंगे अपनी सीट

नई वेबसाइट में एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब यात्री बुकिंग करते समय खुद अपनी पसंदीदा सीट चुन सकते हैं, बजाय इसके कि वो पूरी तरह ऑटोमैटिक सीट अलॉटमेंट पर निर्भर रहें। साथ ही, Sleeper, AC 3 Tier और AC 2 Tier जैसी अलग-अलग क्लास की सीट अवेलेबिलिटी अब एक ही स्क्रीन पर दिख जाएगी, जिससे बार-बार टैब बदलने की झंझट खत्म हो जाएगी।

फेयर कैलेंडर और मल्टीलैंग्वेज सपोर्ट

नई वेबसाइट में एक फेयर कैलेंडर फीचर भी जोड़ा गया है। इसकी मदद से यात्री अलग-अलग तारीखों के लिए टिकट का किराया आपस में कंपेयर कर सकते हैं, और फिर उसी हिसाब से अपनी यात्रा की तारीख तय कर सकते हैं। यह फीचर उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयोगी है जो बजट के हिसाब से यात्रा प्लान करते हैं।

इसके अलावा वेबसाइट अब मल्टीलैंग्वेज सपोर्ट के साथ आती है, यानी यह अब कई भाषाओं में उपलब्ध है। इससे देशभर के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले यात्रियों के लिए वेबसाइट का इस्तेमाल करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।

पेमेंट प्रोसेस भी हुई स्मूथ

पेमेंट प्रोसेस को भी स्ट्रीमलाइन किया गया है। चेकआउट अब तेज है और पेमेंट इंटीग्रेशन पहले से स्मूथ, जिससे ट्रांजैक्शन फेल होने के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

लॉन्च से पहले हुई टेस्टिंग

यह नई वेबसाइट अचानक नहीं आई है। देशभर में लॉन्च करने से पहले IRCTC ने इसका बीटा वर्जन चुनिंदा यूजर्स के साथ टेस्ट किया, जिसमें स्टूडेंट्स भी शामिल थे। इस टेस्टिंग का मकसद था फीडबैक इकट्ठा करना और सिस्टम को और बेहतर बनाना, ताकि नेशनल लॉन्च के समय कोई बड़ी दिक्कत सामने न आए।

यात्रियों के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव

अब सवाल यह है कि आम यात्री के लिए इसका असली मतलब क्या है। अगर वेबसाइट सच में उतनी तेज और स्टेबल साबित होती है जितना दावा किया जा रहा है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा तत्काल बुकिंग के समय दिखेगा, जब हर सेकंड मायने रखता है।

हालांकि किसी भी नई टेक्नोलॉजी की असली परीक्षा तब होती है जब वो लाखों यूजर्स के असली लोड में इस्तेमाल होती है। बीटा टेस्टिंग में मिले नतीजे भले ही अच्छे रहे हों, लेकिन नेशनल लॉन्च के बाद पीक ट्रैफिक में यह वेबसाइट कैसा परफॉर्म करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

फिलहाल के लिए इतना जरूर कहा जा सकता है कि IRCTC ने यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायतों को सुना है, और उन्हें दूर करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है।

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