पिछले कुछ दिनों में इतनी बारिश हुई… और अब तक अगर आपने मानसून ट्रिप नहीं की, तो फायदा ही क्या? मुंबईकरों को दूर नहीं जाना, तो कोई बात नहीं। पास में भी एक से बढ़कर एक बारिश वाली जगहें हैं। कोलाड उन्हीं में से एक है। पहुंचने में करीब तीन घंटे लगते हैं। झरनों में भीगने, जंगल में घूमने, रिवर राफ्टिंग करने और बारिश के संगीत के बीच गरमागरम भजिए खाने पहुंच जाइए। रायगढ़ जिले के इस छोटे से गांव को महाराष्ट्र के “एडवेंचर कैपिटल ऑफ मानसून” का खिताब मिला है। जानिए इसकी वजह।

मानसून में सह्याद्रि की पहाड़ियां हरी-भरी हो जाती हैं। यहां पहाड़ों से अनगिनत झरने बहते हैं। कुंडलिका नदी दोनों किनारों पर उफान पर आ जाती है। धुंध की चादर पूरी घाटी को अपनी बाहों में समेट लेती है। इस तरह कोलाड साहस और प्रकृति को एक साथ महसूस करने का अनुभव बन जाता है।

कोलाड कहां है?

रोहा तालुका में बसा कोलाड एक छोटा सा गांव है, जो मुंबई से करीब 120 किलोमीटर दूर है। सह्याद्रि की गोद में बसे इस गांव की सबसे बड़ी पहचान कुंडलिका नदी है। पश्चिमी घाट की यह नदी अरब सागर की ओर बहती है। इसके रास्ते में घाटियां, जंगल और पहाड़ आते हैं। मंत्रमुग्ध कर देने वाला है यह कॉम्बिनेशन। कोलाड का मौसम साल भर सुहावना रहता है, लेकिन मानसून में इसकी खूबसूरती अपने चरम पर होती है। जून से सितंबर तक पूरा इलाका हरियाली से लबालब हो जाता है। कई झरने, गीली मिट्टी की खुशबू, पक्षियों की चहचहाहट और लगातार बारिश यहां की यात्रा को खास बना देते हैं।

कुंडलिका नदी पर भीरा डैम है। इससे नियंत्रित तरीके से छोड़े जाने वाले पानी की वजह से कोलाड में साल के ज्यादातर समय रिवर राफ्टिंग संभव हो पाती है। यही खासियत इसे बाकी बारिश वाली जगहों से अलग बनाती है। कोलाड के आसपास ताम्हिणी घाट, देवकुंड इलाका, पहाड़ी रास्ते, खेती पर निर्भर गांव और झरने हैं। हो सके तो वहां दो-तीन दिन रुककर धीरे-धीरे पूरे कोलाड को दिल खोलकर महसूस करना चाहिए।

कैसे पहुंचें?

मुंबई से कोलाड पहुंचने का सफर सड़क मार्ग से सबसे सुविधाजनक है। मुंबई-गोवा हाईवे या मुंबई-पनवेल-नागोठणे होते हुए वहां आसानी से पहुंचा जा सकता है, करीब तीन घंटे में। रास्ते में घाट और बारिश के नजारे सफर को बेहद खूबसूरत बना देते हैं। कोंकण रेलवे लाइन पर कोलाड स्टेशन है, जो इस लाइन का पहला स्टेशन है। मुंबई से रोहा की ओर जाने वाली कुछ ट्रेनें यहां रुकती हैं। रोहा से टैक्सी या लोकल वाहन से कोलाड पहुंचा जा सकता है।

मानसून में क्या करें?

कोलाड का सबसे बड़ा आकर्षण कुंडलिका रिवर राफ्टिंग है। करीब बारह किलोमीटर लंबे रूट वाली यह राफ्टिंग महाराष्ट्र में सबसे लोकप्रिय है। भीरा डैम के पानी से ही यह संभव हो पाती है। बारिश के मौसम में प्राकृतिक सुंदरता राफ्टिंग के अनुभव को यादगार बना देती है। इसके अलावा कायकिंग, ज़िपलाइन, बर्मा ब्रिज, वैली क्रॉसिंग जैसी अन्य साहसिक गतिविधियां भी कोलाड के कैंप्स में मिलती हैं। बारिश के मौसम में कोलाड में कई झरने रास्ते में ही स्वागत करते नजर आते हैं। कुछ तक पहुंचने के लिए छोटी ट्रेकिंग करनी पड़ती है। फोटोग्राफी के लिए कोलाड का इलाका बारिश में किसी ओपन स्टूडियो जैसा बन जाता है। ताम्हिणी घाट की तरफ ड्राइव करना मानसून यात्रा का एक अलग ही अनुभव है। इस रास्ते पर भी धुंध, घाटी, झरने और बादलों के साथ दोस्ती की जा सकती है।

जंगल में घूमना, पक्षी देखना, गांव में टहलना, नदी किनारे बैठकर बारिश निहारना या कैंपफायर का मजा लेना, कोलाड कई विकल्पों का खजाना है। याद रहे कि मानसून में यहां पानी का मिजाज और बहाव कभी भी बदल सकता है। सिर्फ अधिकृत संचालकों के साथ ही राफ्टिंग करनी चाहिए और स्थानीय निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

कहां ठहरें?

कोलाड में पिछले कुछ सालों में पर्यटन काफी विकसित हुआ है। इसलिए अलग-अलग बजट के हिसाब से ठहरने की अच्छी व्यवस्था यहां मौजूद है। कुंडलिका नदी के किनारे रिवरसाइड रिसॉर्ट्स काफी लोकप्रिय हैं। यहां बारिश की सुबह, हरा-भरा माहौल और नदी की कलकल के बीच ठहरने का अपना ही मजा है। एडवेंचर पसंद करने वालों के लिए टेंट कैंप और एडवेंचर कैंप भी हैं। कई कैंप्स में राफ्टिंग, खाना और ठहरने के पैकेज भी मिलते हैं। परिवार के साथ जाने वालों के लिए होमस्टे और फार्मस्टे का विकल्प भी है। स्थानीय आतिथ्य और गांव के जीवन का अनुभव भी इसी में लिया जा सकता है।

खाने-पीने का क्या?

कोलाड में खाने की खासियत उसकी सादगी में छिपी है। ज्यादातर असली मराठी खाना, वो भी घर जैसा, हर जगह मिल जाता है। शाकाहारियों के लिए रोटी, भाकरी, पिठलं, वरणभात, सब्जी, दाल, भजिए, पापड़, अचार जैसे कई तरह के व्यंजन मिलते हैं। बारिश में प्याज के भजिए, आलू वड़ा और गरम चाय तो जरूर याद रखनी चाहिए। जैन खाना भी उपलब्ध है। वीकेंड्स पर कई जगहों पर बुफे भी होता है। यात्रा में थोड़ा नाश्ता साथ रखना भी अच्छा रहेगा।

यह भी जान लें…

कोलाड घूमने के लिए जून से सितंबर सबसे अच्छा समय है। भारी बारिश में ट्रेकिंग के कुछ विकल्प बंद हो सकते हैं। यात्रा से पहले जानकारी जरूर ले लें। कोलाड के पास देवकुंड नाम का मशहूर झरना है। मानसून में सुरक्षा कारणों से वहां जाने पर पाबंदी हो सकती है। इस बारे में भी पता कर लेना चाहिए। ताम्हिणी घाट, भीरा डैम, घोसालगड, अवचितगड जैसी जगहों की सैर भी ध्यान में रखनी चाहिए।

अच्छी ग्रिप वाले जूते, रेनकोट और अतिरिक्त कपड़े साथ रखना भी जरूरी है। मोबाइल नेटवर्क ज्यादातर इलाकों में मिल जाता है। जंगल के कुछ हिस्सों में सिग्नल कमजोर पड़ सकते हैं। तो चलिए, गाड़ी निकालिए और पहुंच जाइए कोलाड।

Subscribe Deshwale on YouTube

Join Our Whatsapp Group

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version