7 मई 2025 को भारत ने उत्तर और पश्चिम में 16 हवाई अड्डों पर नागरिक उड़ानें रोक दीं। यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद लिया गया, जिसमें पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला किया गया। सरकार यहीं नहीं रुकी। उसने सीमा के पास रिफाइनरियों और बिजली संयंत्रों को हाई अलर्ट पर रखा।
अब सवाल उठता है क्यूँ? क्यूंकी पहलगाम में हुए एक खौफनाक आतंकी हमले ने देश को झकझोर दिया था। भारत अब सुरक्षा को सबसे ऊपर रख रहा है।
हवाई अड्डे क्यों बंद किए?
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया। यह 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले का जवाब था, जिसमें 26 लोग मारे गए। हमले सटीक थे, पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया। लेकिन पाकिस्तान ने सीमा पर गोलीबारी शुरू कर दी। श्रीनगर, जम्मू, लेह और अमृतसर जैसे हवाई अड्डों को बंद करना आसमान को सुरक्षित रखने का कदम था।
यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
हवाई अड्डे बंद होने से यात्री परेशान हैं। इंडिगो ने 10 मई तक 165 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दीं। यात्रियों से ऑनलाइन उड़ान की स्थिति जांचने को कहा गया। लोग उड़ानें बदल सकते हैं या पूरा रिफंड ले सकते हैं। लेकिन जोधपुर, शिमला और चंडीगढ़ जैसे शहरों के हवाई अड्डे खामोश हैं। कई लोगों की मीटिंग्स छूटीं, कुछ को होटल में रुकना पड़ा। भारत के हवाई अड्डे बंद होने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई।
महत्वपूर्ण ढांचे की सुरक्षा
हवाई अड्डों के अलावा, सरकार ने सीमा के पास रिफाइनरियों और बिजली संयंत्रों की सुरक्षा बढ़ा दी। सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स हाई अलर्ट पर है। एक भी हमला बिजली या ईंधन आपूर्ति को ठप कर सकता है। भारत कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। यह दिखाता है कि देश कितनी गंभीरता से चीजों को सुचारू रखने की कोशिश कर रहा है, भले ही पाकिस्तान के साथ तनाव चरम पर हो।
क्या है पूरी तस्वीर?
भारत के हवाई अड्डे बंद करना पहलगाम की त्रासदी के बाद देश को सुरक्षित रखने की जरूरत से उपजा। ऑपरेशन सिंदूर एक सीधा जवाब था, लेकिन इसने सीमा पर गोलीबारी को भड़काया। हवाई अड्डों को बंद करके और महत्वपूर्ण ठिकानों को सुरक्षित करके, भारत दिखा रहा है कि सुविधा से ज्यादा सुरक्षा जरूरी है। सरकार ने उसी समय हवाई अभ्यास और सिविल डिफेंस ड्रिल की योजना बनाई, जो दिखाता है कि वह हर स्थिति के लिए तैयार है। सबको उम्मीद है कि जल्द शांति बहाल होगी।


