नागपुर पुलिस ने सायबर अपराध से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। ‘गरुड़ दृष्टि’ नामक सोशल मीडिया मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट का आज प्रस्तुतीकरण हुआ। इस दौरान राज्य के गृहमंत्री के नेतृत्व में अधिकारियों ने इसकी विशेषताएं साझा कीं।
सोशल मीडिया पर बढ़ती चुनौतियां
सोशल मीडिया आज अभिव्यक्ति का माध्यम है, लेकिन इसका इस्तेमाल अफवाह फैलाने, नफरत भड़काने, अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री और अपराध योजनाओं में भी किया जा रहा है। गरुड़ दृष्टि ऐसे सभी पोस्ट और अकाउंट्स को ट्रैक कर तत्काल कार्रवाई करने में सक्षम है।
नागपुर से पूरे राज्य तक
नागपुर पुलिस ने इस टूल को अपने स्तर पर विकसित किया है। भविष्य में इसे महाराष्ट्र के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा। यह स्थानीय नवाचार सायबर हैक 2025 प्रतियोगिता से प्रेरित है और इसके बौद्धिक संपदा अधिकार नागपुर पुलिस के पास हैं।
कार्यक्रम में हुए अहम फैसले
प्रस्तुतीकरण के दौरान पुलिस ने सायबर ठगी में बचाई गई रकम पीड़ितों को लौटाई। अधिकारियों ने बताया कि समय पर शिकायत दर्ज करने और तत्पर कार्रवाई से लाखों रुपये बचाए गए। नागरिकों से अपील की गई कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर तुरंत 1930 या 1945 हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
मुख्य विशेषताएं और उपलब्धियां
- 30,000 पोस्ट की जांच: अब तक सोशल मीडिया से जुड़ी 30,000 पोस्ट की मॉनिटरिंग।
- 650 पोस्ट हटाई गईं: आपत्तिजनक सामग्री वाले 650 पोस्ट संबंधित प्लेटफॉर्म से डिलीट कराए गए।
- कानून व्यवस्था पर नियंत्रण: अफवाह और भड़काऊ कंटेंट से उपजे तनाव को रोका गया।
- कम लागत में विकास: यह टूल बहुत कम खर्च में विकसित किया गया।
- मल्टी-यूज क्षमता: अपराध रोकथाम के साथ ट्रेंड एनालिसिस और संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान।
जनजागरण में जनता की भूमिका
अधिकारियों ने पीड़ित नागरिकों को सायबर अपराध के खिलाफ ‘राजदूत’ बनने का आग्रह किया। उनका मानना है कि जागरूकता ही ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने का सबसे मजबूत हथियार है।


