इंदौर में देश का पहला ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होगा। यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर आधारित होगा। इस प्लांट में हरित कचरे को संसाधित कर उपयोगी उत्पादों में बदला जाएगा।

नगर निगम को होगी कमाई

इंदौर नगर निगम (IMC) इस प्लांट से आर्थिक लाभ भी कमाएगा। निगम को लकड़ी और शाखाओं की आपूर्ति पर प्रति टन 3,000 रुपये की रॉयल्टी मिलेगी।

क्या होगा प्लांट में?

  • यह संयंत्र लकड़ी और शाखाओं को रीसाइकिल करेगा।
  • इनसे लकड़ी की पट्टियां बनेंगी, जो कोयले का विकल्प होंगी।
  • बड़े पेड़ों की शाखाएं प्लांट में भेजी जाएंगी।
  • प्रमुख संस्थानों से हरा कचरा सीधा एकत्र किया जाएगा।

30 टन से ज्यादा कचरा रोज

इंदौर में हर दिन लगभग 30 टन हरित कचरा निकलता है। शरद ऋतु में यह 60-70 टन तक बढ़ सकता है।

कचरे से बनेगा बुरादा

एस्ट्रोनॉमिकल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड ने नगर निगम के साथ मिलकर इस पहल को शुरू किया है। हरा कचरा सुखाकर महीन बुरादे में बदला जाएगा। इसे ईंधन, पैकिंग सामग्री, फर्नीचर और उर्वरक के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। बुरादा पर्यावरण के अनुकूल ईंधन का विकल्प बनेगा। यह कोयले और पारंपरिक जलाने के तरीकों का स्वच्छ विकल्प देगा।

नगर निगम और निजी कंपनियों की साझेदारी

  • IMC भूमि और हरित कचरा उपलब्ध कराएगा।
  • निजी कंपनी बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराएगी।
  • प्लांट की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी की होगी।

अन्य शहर भी अपना सकते हैं यह मॉडल

इस प्लांट से न केवल कचरे का सही निपटान होगा, बल्कि नगर निगम को राजस्व भी मिलेगा। यह स्वच्छ भारत मिशन के तहत एक बड़ा कदम है। इस पहल से अन्य शहरों को भी प्रेरणा मिलेगी।

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