दक्षिण भारतीय फिल्मों के देशव्यापी प्रभाव के बीच जाट का आगमन सुखद आश्चर्य की तरह है। शायद यह पहली फिल्म है जिसमें निर्देशक ने साउथ की फिल्ममेकिंग स्टाइल को नॉर्थ के सुपरस्टार के साथ जोड़ा है। खलनायक भी बॉलीवुड से है। कहानी इस तरह बुनी गई है कि भारत के किसी भी कोने का दर्शक इससे जुड़ सकता है। बॉडीगार्ड, क्रैक, वीरा सिम्हा रेड्डी जैसी तेलुगु फिल्मों के निर्देशक गोपीचंद मलीनेनी जाट से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे हैं। तो क्या है फिल्म की कहानी? कैसी है ये?

कहानी शुरू होती है 15-16 साल पहले के श्रीलंका से। एलटीटीई जैसे संगठन जेटीएफ का कमांडर मुथ्थुवेल श्रीलंकन सेना के चंगुल से बचकर भारत आता है। वो घूस देकर भारतीय नागरिकता हासिल करता है और रणतुंगा (रणदीप हुड्डा) बनकर आंध्र प्रदेश में बस जाता है। राज्य तटीय इलाके में वो जल्द ही अपने आतंक से विशाल साम्राज्य खड़ा कर लेता है। पुलिस से लेकर मंत्री तक सभी उसकी जेब में हैं। उसे रोकने के लिए बहादुर महिला इंस्पेक्टर विजयालक्ष्मी (सायामी खेर) अपनी महिला टीम के साथ उसके घर जाती है। उसकी पत्नी भारती (रेजिना कैसेंड्रा) और गुंडे सभी महिला पुलिस अफसरों को कैद कर उन पर अत्याचार करते हैं।

दूसरी ओर, दक्षिण भारत से अयोध्या के लिए एक विशेष ट्रेन चल रही है। उसमें एक रामभक्त जाट (सनी देओल) सफर कर रहा है। ट्रेन रुकती है तो वह ट्रैक के पास एक ढाबे पर नाश्ता करने जाता है। वो इडली खा ही रहा होता है कि कुछ गुंडे आ धमकते हैं। उनके लापरवाह सरदार की टक्कर से जाट की प्लेट गिर जाती है। जाट गुंडे से “सॉरी” कहने कहता है, लेकिन वह मानता नहीं, तो जाट उसकी और उसके साथियों की जबरदस्त पिटाई करता है। गुंडा धमकाता है, “मेरे भाई रामा रेड्डी (अजय घोष) को पता चला तो तेरा काम तमाम!” जाट जवाब देता है, “अच्छा, तो सॉरी अब तू नहीं, तेरा भाई बोलेगा?”

यहीं से जाट की यात्रा शुरू होती है। रामा रेड्डी से लेकर उसके ऊपर वाले गुंडे तक और आखिर में रणतुंगा तक। जो भी उसके रास्ते में आता है, वह उसकी ताकत और नियत का स्वाद चखता है। लेकिन ये जाट है कौन? रावण जैसे रणतुंगा की ताकत का राज़ क्या है? उसने अपने इलाके के चालीस गांवों को क्यों उजाड़ा? क्यों यह अंधाधुंध हत्याएं करता है? और यह जाट असल में है कौन?

जाट इन सब सवालों का जवाब है। एक्शन से भरपूर, दमदार डायलॉग्स वाली यह फिल्म इंटरवल तक तेज़ी से भागती है। कहानी सिर्फ एक दिन की है। फ्लैशबैक से संदर्भ खुलते हैं। इंटरवल के बाद कुछ मिनटों तक गति धीमी होती है, लेकिन पुलिस स्टेशन वाला सीन आते ही रफ्तार फिर पकड़ में आ जाती है और क्लाइमैक्स तक नहीं रुकती।

बिना दिमाग लगाए सिर्फ मजे के लिए फिल्म देखने वालों के लिए जाट पूरी तरह मनोरंजक है, ठीक वैसे ही जैसे साउथ की फिल्में। फिल्म का फ्रेमिंग, स्टाइल, स्क्रीनप्ले भी कई हद तक पुष्पा-फाइड है। उर्वशी रौतेला वाला आइटम सॉन्ग सॉरी बोल भी पुष्पा की झलक देता है। और, जैसे ही दर्शक फिल्म के बाहर का कुछ सोचने लगे कि कोई नया ट्विस्ट आ जाता है।

तकनीकी रूप से भी यह असली साउथ स्टाइल मसाला है। सिनेमैटोग्राफी (रिशी पंजाबी) और एडिटिंग (नवीन नूली – पुष्पा 2 के एडिटर) परफेक्ट हैं। कुछ डायलॉग्स (साई माधव बुरा और सौरभ गुप्ता) तालियों और सीटियों के लायक हैं। “ये ढाई किलो का हाथ पूरे नॉर्थ ने देखा है, अब साउथ की बारी है…” जैसे डायलॉग्स एक्शन लवर्स और देओल फैंस को खूब पसंद आएंगे। अनल अरासू का एक्शन सनी पर बिल्कुल फिट बैठता है। आजकल की फिल्मों में मारधाड़ को ग्लोरिफाई करने का ट्रेंड है। जाट भी इसमें पीछे नहीं। कटने वाले सिरों की गिनती करने बैठेंगे तो गए काम से। 

सनी के साथ रणदीप हुड्डा ने शानदार परफॉर्मेंस दी है। रणतुंगा का किरदार उनके करियर के बेस्ट किरदारों में जगह बनाएगा। भारती बनी रेजिना भी अच्छी हैं। सीबीआई अफसर मूर्ति के रोल में जगपति बाबू, सोमुलु बने विनीत कुमार सिंह, रामा रेड्डी बने अजय घोष (पुष्पा 2, म्यूज़िक शॉप मूर्ति) और बाकी कलाकार अपने-अपने रोल में फिट हैं। सपोर्टिंग कास्ट में राम्या कृष्णन, मकरंद देशपांडे, ज़रीना वहाब और गेस्ट अपियरेंस में मुरली शर्मा और उपेंद्र लिमये हैं।

गीत-संगीत (गीतकार: कुमार, अद्वितीय वोज्जाला, श्रुति रंजनी, कुंदन पांडे, अमृत मान; संगीतकार: थमन एस.) कमजोर है। शुरूआती राम भजन ओ राम श्रीराम थोड़ा ठीक-ठाक है। इसके अलावा, आइटम सॉन्ग अनावश्यक है। 

निर्माता पुष्पा फेम नवीन येरनेनी, यालामंचिली रवि शंकर, टी. जी. विश्व प्रसाद और उमेश कुमार बंसल हैं। मैत्री मूवी मेकर्स और पीपल फिल्म फैक्ट्री द्वारा निर्मित जाट की असली ताकत है इसकी ट्रेंडिंग कहानी, सनी-रणदीप की दमदार परफॉर्मेंस और साउथ-नॉर्थ का मेल। कुल मिलाकर 153 मिनट की यह फिल्म दर्शकों को पूरी तरह संतुष्ट करके घर भेजती है।

रेटिंग: 3.5 स्टार्स

कलाकार: सनी देओल, रणदीप हुड्डा, सैयामी खेर, रेजिना कैसेंड्रा, जगपति बाबू, अजय घोष, विनीत कुमार सिंह, स्वरूपा घोष, राम्या कृष्णन, मकरंद देशपांडे, ज़रीना वहाब, मुरली शर्मा, उपेंद्र लिमयेबैनर्स: मैत्री मूवी मेकर्स और पीपल फिल्म फैक्टरी
निर्माता: नवीन येरनेनी, यालामंचिली रवि शंकर, टी. जी. विश्व प्रसाद और उमेश कुमार बंसल
कहानी व निर्देशन: गोपीचंद मलीनेनी
पटकथा: गोपीचंद मलीनेनी, श्रीनिवास गविरेड्डी, कुंदन पांडे
संवाद: साई माधव बुरा और सौरभ गुप्ता
गीत: कुमार, अद्वितीय वोज्जाला, श्रुति रंजनी, कुंदन पांडे, अमृत मान
संगीत: थमन एस.
एक्शन: अनल अरासु
छायांकन: ऋषि पंजाबी
संपादन: नवीन नूली

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