जब इतिहास केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतना बन जाए, तब विचार समाज को दिशा देने लगते हैं। इसी भावना के साथ मुंबई के विले पार्ले ईस्ट में वीर सावरकर के जीवन, विचार और राष्ट्रवादी दर्शन पर आधारित तीन पुस्तकों का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन युवाओं, विद्वानों और जागरूक नागरिकों के लिए वैचारिक संवाद का एक सशक्त मंच बनकर उभरा।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू फाउंडेशन के संस्थापक एवं वैश्विक अध्यक्ष स्वामी विज्ञानंद सरस्वती और महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की गरिमामयी उपस्थिति रही। लेखिका डॉ. वैदेही तमन द्वारा लिखित तीनों पुस्तकें—Reclaiming Bharat (अंग्रेज़ी), वीर सावरकर की क्रांतिकारी यात्रा (हिंदी) और वीर सावरकरांची क्रांतिकारी यात्रा (मराठी)—विभिन्न भाषाओं के माध्यम से सावरकर के क्रांतिकारी जीवन, अडिग राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण में उनके योगदान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास करती हैं।

पुस्तक विमोचन के बाद आयोजित संवाद सत्र में श्रोताओं ने सावरकर की विचारधारा, ऐतिहासिक दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े मुद्दों पर अपने प्रश्न रखे। इससे यह स्पष्ट हुआ कि समकालीन समाज में सावरकर के विचारों को लेकर रुचि न केवल बढ़ी है, बल्कि वह अधिक गंभीर और विचारोत्तेजक भी हो रही है।

इस अवसर पर मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सावरकर को किसी सीमित छवि में न देखें, बल्कि उनके मूल लेखन और वैचारिक दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करें। वहीं स्वामी विज्ञानंद सरस्वती ने आत्मनिर्भरता, उद्यमिता, सशक्त रक्षा व्यवस्था, हिंदू एकता और समग्र राष्ट्र निर्माण जैसी सावरकर की दूरदर्शी अवधारणाओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. वैदेही तमन की सरल और पाठक-केंद्रित लेखन शैली की सराहना की।

लेखिका डॉ. वैदेही तमन के सम्मान के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन इस बात का संकेत देता है कि सावरकर की विचारधारा आज भी सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बनी हुई है और इसे समझने के लिए संतुलित, तथ्यपरक और सहज भाषा में प्रस्तुत साहित्य की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।

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