२८ फ़रवरी २०२६ की सुबह जब तेहरान में लोग अपने रोज़मर्रा के कामों में लगे थे, तब दुनिया के सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक की शुरुआत हो चुकी थी। अमेरिकी रक्षा विभाग ने इसे “ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी” नाम दिया और इज़राइल ने अपने हिस्से को “ऑपरेशन रोअरिंग लायन” कहा। यह सिर्फ़ मिसाइल हमला नहीं था। यह दशकों की कूटनीतिक खींचतान, परमाणु तनाव और प्रतिनिधि संघर्षों का एक हिंसक परिणाम था।
हमले की पृष्ठभूमि: बातचीत की मेज़ से रणभूमि तक
पिछले कुछ महीनों में ईरान और अमेरिका के बीच ओमान की मध्यस्थता में परमाणु वार्ता चल रही थी। जिनेवा में दूसरे दौर की बातचीत तय थी। लेकिन फ़रवरी २०२६ के प्रारंभ में ईरान के भीतर बड़े पैमाने पर नागरिक प्रदर्शन हुए जिन्हें सरकार ने बेरहमी से दबाया। हज़ारों लोग हताहत हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उस वक़्त सार्वजनिक रूप से कहा था कि “मदद रास्ते में है।”
इसके साथ ही ईरान समर्थित गुटों द्वारा मध्यपूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और व्यापारिक जहाज़ों पर हमले जारी थे। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर था। उधर अमेरिका ने अपने दो विमानवाहक पोत पहले से तैनात कर रखे थे। यूएसएस गेराल्ड फ़ोर्ड पूर्वी भूमध्यसागर में था और यूएसएस अब्राहम लिंकन उत्तरी अरब सागर में। यानी हमले से पहले ही बिसात बिछ चुकी थी।
ऑपरेशन की शुरुआत: रात के डेढ़ बजे
अमेरिकी पूर्वी समयानुसार रात के लगभग १:१५ बजे यानी ईरान में सुबह के क़रीब ९:४५ बजे हमला शुरू हुआ। टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलें समुद्री जहाज़ों से दागी गईं। बी-२ स्टेल्थ बमवर्षक विमानों ने गहरे ज़मीनी ठिकानों को निशाना बनाया और सेंटकॉम के अनुसार इन्होंने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल केंद्रों पर २,०००-पाउंड बम गिराए। इज़राइल के लगभग २०० लड़ाकू विमान भी इस अभियान में शामिल थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने पहली बार अपने “टास्क फ़ोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक” के एकतरफ़ा हमलावर ड्रोन युद्ध में उतारे। ये ड्रोन ईरान के शाहेद ड्रोन की तर्ज़ पर बने थे और इनकी मारक क्षमता का अंदाज़ा उस वक़्त हुआ जब ईरानी रडार तंत्र इन्हें पकड़ भी नहीं पाया।
सेंटकॉम ने रविवार को बताया कि पहले २४ घंटों में कुल १,०००से अधिक लक्ष्य तबाह किए गए। इनमें आईआरजीसी के कमान-नियंत्रण केंद्र, वायु रक्षा प्रणालियाँ, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च स्थल तथा सैन्य हवाई अड्डे शामिल थे।
कोनारक नौसैनिक अड्डे पर हमला
यह शायद पूरे ऑपरेशन का सबसे महत्त्वपूर्ण नौसैनिक पहलू था। चाहबहार बंदरगाह के पास स्थित कोनारक नेवल बेस ईरान की नौसेना के तीसरे नेदाजा नौसैनिक जिले का प्रमुख केंद्र है। यह ईरान का एकमात्र बंदरगाह है जिसकी सीधी पहुँच हिंद महासागर तक है। यह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बायपास करता है।
उपग्रह चित्रों में धुआँ उठते और एक जहाज़ को पानी में डूबते दिखाया गया। वाणिज्यिक उपग्रह कंपनी वैंटर और अन्य स्वतंत्र विश्लेषकों ने इसकी पुष्टि की। सेंटकॉम ने १ मार्च को आधिकारिक रूप से बताया कि जमारान-श्रेणी का एक कोर्वेट आईआरआईएस जमारान चाहबहार के घाट पर डूब रहा है। बयंदोर श्रेणी के दो कोर्वेट आईआरआईएस बयंदोर (८१) तथा आईआरआईएस नाग़दी को भी नुकसान पहुँचा।
आईआरआईएस जमारान का नाम पहले भी सुर्खियों में आया था। मई २०२० में एक नौसैनिक अभ्यास के दौरान इसी जहाज़ ने गलती से नूर मिसाइल दागकर अपने सहायक पोत कोनारक को ही ध्वस्त कर दिया था जिसमें १९ नाविक मारे गए थे। इस बार इसका अंत अलग तरह से हुआ।
यह ध्यान देने योग्य है कि हमले से पहले कोनारक बेस पर कई जहाज़ खड़े थे। लेकिन हमले से कुछ ही पहले उनमें से ज़्यादातर को हटा लिया गया। आख़िरी बचे पोत को टग-बोट की मदद से घाट पर लाते हुए उपग्रह छवि में देखा गया जो कि अपने आप में एक अजीब और कुछ अनसुलझी तस्वीर है क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह पोत वहाँ जानबूझकर छोड़ा गया या बस हटाने का समय नहीं मिला। इसके बाद जो हुआ वह इतिहास बन गया।
ख़ामेनेई की मौत
२८ फ़रवरी की शाम को राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई मारे गए। इज़राइल के रक्षामंत्री इज़राइल काट्ज़ ने बाद में कहा कि ख़ामेनेई ऑपरेशन के “पहले प्रहार” में ही समाप्त हो गए। इज़राइली ख़ुफ़िया सूत्रों के अनुसार उनका शव मलबे में मिला। शुरुआत में ईरानी विदेश मंत्रालय ने इनकार किया लेकिन रविवार को ईरानी राज्य मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि कर दी। इज़राइली सेना ने बताया कि इस ऑपरेशन में ४० से अधिक वरिष्ठ ईरानी कमांडर मारे गए जिनमें ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ अब्दोलरहीम मूसवी भी शामिल थे। आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ़ मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर और रक्षा परिषद के सचिव रियर एडमिरल अली शमख़ानी के मारे जाने की भी पुष्टि हुई।
ख़ामेनेई ने सन् १९८९ से ईरान की सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखी थी। उनकी मौत से जो शून्य उत्पन्न हुआ है वह ईरान की राजनीतिक व्यवस्था के लिए बेहद जटिल सवाल खड़े करता है।
ईरान का जवाब: पूरा क्षेत्र निशाने पर
तो, ईरान ने चुप रहकर नहीं बैठा। मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कई देशों की ओर की गई। इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सभी ने हमलों की पुष्टि की। इज़राइल में येरूशलम के पास बेत शेमेश शहर में ईरानी मिसाइलें आवासीय इलाक़े में गिरीं जिनमें कम से कम ८ इज़राइली नागरिक मारे गए। दुबई के फ़ेयरमॉन्ट होटल के पास आग और धमाका देखा गया। अबु धाबी में आपातकालीन अलर्ट जारी हुए। दुबई और अबु धाबी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे बंद कर दिए गए। क़तर एयरवेज़ और एतिहाद एयरवेज़ की उड़ानें रद्द हुईं। वैश्विक स्तर पर रविवार को लगभग ७,७०० उड़ानें देरी से चलीं और २,२०० से अधिक रद्द हुईं।
खाड़ी देशों की वायु रक्षा प्रणालियों ने मिलकर कम से कम २८२ ईरानी मिसाइलें और ८३३ ड्रोन मार गिराए। ओमान के प्राथमिक बंदरगाह पर भी ईरानी ड्रोन हमला हुआ जिसमें एक बंदरगाह कर्मचारी घायल हुआ। यह उल्लेखनीय है क्योंकि ओमान वही देश है जो हमले से ठीक पहले तक अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। हिज़्बुल्लाह ने बदला लेने की क़सम खाई। यमन के हूती नेता ने कहा कि उनकी सेना “पूरी तैयारी” में है।
ईरान के रेड क्रेसेंट सोसाइटी ने बताया कि ईरान में हुए हमलों में दो सौ से अधिक लोग मारे गए। ईरान ने ४० दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया।
अमेरिकी नुकसान भी हुआ
सेंटकॉम ने रविवार १ मार्च को स्वीकार किया कि ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और पाँच गंभीर रूप से घायल हुए। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार तीनों मारे गए सैनिक कुवैत में तैनात आर्मी के लॉजिस्टिक्स यूनिट के थे। कई अन्य को मामूली चोटें आईं। ईरान के एक शाहेद-प्रकार के ड्रोन ने एक अमेरिकी नौसेना सहायक केंद्र पर हमला किया और एक रेडोम को नष्ट कर दिया। अमेरिकी मीडिया में इन नुकसानों की चर्चा कम रही। यह कोई नई बात नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र और बाक़ी दुनिया की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरेश ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक में दोनों पक्षों की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अनियंत्रित घटनाओं की एक श्रृंखला की ओर बढ़ रहा है। प्रस्ताव लाए गए। वीटो हुए। बयान जारी हुए। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका को समर्थन दिया। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि अमेरिका ब्रिटिश अड्डों का इस्तेमाल “रक्षात्मक” हमलों के लिए कर सकता है। ब्रिटेन में लंदन की सड़कों पर प्रदर्शन हुए।
यह वह हिस्सा है जहाँ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ हमेशा की तरह बहुत कुछ बोलती हैं और बहुत कम कर पाती हैं।
भारत के लिए चाहबहार का सवाल
एक पहलू जिस पर मुख्यधारा की चर्चा कम हुई वह है भारत। चाहबहार बंदरगाह में भारत का निवेश है और अफ़ग़ानिस्तान तथा मध्य एशिया तक पहुँचने के लिए यह बंदरगाह भारत की रणनीतिक सोच का हिस्सा रहा है। कोनारक नेवल बेस और चाहबहार की भौगोलिक निकटता को देखते हुए यह स्वाभाविक सवाल है कि हमलों से बंदरगाह की दीर्घकालिक कार्यक्षमता प्रभावित हुई है या नहीं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
अमेरिकी कांग्रेस में असहमति
सब कुछ एकमत नहीं था। कुछ अमेरिकी सांसदों ने संवैधानिक आधार पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कांग्रेस की मंज़ूरी के बिना इतने बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत संविधान के विरुद्ध है। एक प्रस्ताव लाया गया जो प्रशासन को किसी भी आगे की कार्रवाई के लिए कांग्रेस की अनुमति लेने को बाध्य करता। मंगलवार को ट्रम्प प्रशासन के सदस्य — विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ — दोनों सदनों को इस ऑपरेशन की जानकारी देंगे। यह बहस नई नहीं है। इराक़ के बाद भी यही हुआ था। लीबिया के बाद भी। और शायद हर बार की तरह इस बार भी इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकलेगा।
स्थिति अभी भी बदल रही है
यह लेख लिखे जाने तक ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी जारी था। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि ऑपरेशन “शेड्यूल से आगे” चल रहा है और उन्होंने एक महीने का टाइमफ़्रेम दिया। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आने वाले दिनों में हमले और तेज़ किए जाएँगे। एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अर्रागची ने ओमान को बताया कि तेहरान तनाव कम करने के किसी भी प्रयास के लिए तैयार है। यह संदेश और हमले एक साथ चल रहे हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य तकनीकी रूप से खुला है लेकिन युद्ध बीमा न मिलने के कारण जहाज़ी यातायात ठप पड़ा है। दुनिया के कच्चे तेल की क़रीब पाँचवीं आपूर्ति यहीं से गुज़रती है। और जिस मेज़ पर बातचीत होनी थी वह मेज़ इस वक़्त मलबे में दबी है।
〔अंतिम अपडेट: २ मार्च २०२६, प्रातः ११:०० बजे IST। यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं, उपग्रह विश्लेषण रिपोर्टों और आधिकारिक सैन्य बयानों पर आधारित है। स्थिति तेज़ी से बदल रही है।〕
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