मारी छोरी भी छोरो से कम नहीं है। यह बात फिर से साबित कर दी भारत की महिला क्रिकेट टीम ने, जब उन्होंने वर्ल्ड कप फाइनल की ट्रॉफी जीतकर पूरे देश का दिल जीत लिया। रविवार का दिन था, जब ये बहादुर बेटियां मैदान पर उतरीं और अपनी मेहनत का फल हासिल किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल में 52 रनों से हराकर इतिहास रच दिया। यह जीत सिर्फ एक मैच की नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट के नए युग की शुरुआत थी।

पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने निर्धारित 50 ओवरों में 298/7 का विशाल स्कोर बनाया। सलामी बल्लेबाज ने आक्रमक पारी खेलते हुए 87 रन बनाए। मध्यक्रम में एक और खिलाड़ी ने शानदार योगदान दिया, वहीं कप्तान ने सही समय पर बड़े शॉट लगाकर टीम को मजबूती दी। यह पारी शैली और आत्मविश्वास दोनों का परिचायक थी।

दक्षिण अफ्रीका ने जवाब में अच्छी शुरुआत की, लेकिन भारत की गेंदबाजी ने मध्यक्रम में मजबूत पकड़ बनाई और मुकाबला भारत के पक्ष में मोड़ दिया। अंत तक दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम 246 रन पर ऑल आउट हो गई। भारत ने 52 रनों से जीत हासिल की और महिला टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप ट्रॉफी उठाई।

299 रनों के जवाब में दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लॉरा वोलवार्ट और ताजमिन ब्रिट्स ने संयमित शुरुआत की। दोनों ने 9वें ओवर तक टीम का स्कोर 50 से ऊपर पहुंचाया। लेकिन 10वें ओवर में अमनजोत कौर ने ब्रिट्स को रन आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई। ब्रिट्स ने 23 रन बनाए। उस समय स्कोर 52/1 था।

12वें ओवर में श्री चरणी ने बिना कोई रन बनाए बॉश को आउट किया। 18वें ओवर तक दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 100 पार कर गया। लेकिन 21वें ओवर में शेफाली वर्मा ने बड़ी साझेदारी तोड़ी और 25 रन बनाने वाली लुस को पवेलियन भेजा।

23वें ओवर में शेफाली ने फिर से कमाल किया और मारिजाने कैप को केवल 4 रन पर आउट किया।

30वें ओवर में दीप्ति शर्मा ने दक्षिण अफ्रीका को पांचवां झटका दिया, जब जाफ्टा 16 रन बनाकर आउट हुईं। 40वें ओवर में उन्होंने 35 रन बनाने वाली एनेरी डर्कसन का विकेट लिया।

42वें ओवर में दीप्ति शर्मा ने कप्तान लॉरा वोलवार्ट को शतक के बाद आउट किया और उसी ओवर में ट्रायोन का भी विकेट झटका। इसी सफलता ने भारत की जीत तय कर दी।

दीप्ति ने इस मुकाबले में कुल 5 विकेट लिए और एक रन आउट भी किया, जिससे दक्षिण अफ्रीका की टीम 246 रन पर ही समेट गई।

मैच खत्म होते ही मैदान पर भावनाओं का सैलाब था। खिलाड़ी एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी के आँसू रोक नहीं पाए। कप्तान ने कहा कि यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि हर उस भारतीय महिला की है जिसने कभी बैट उठाने का सपना देखा। उपकप्तान ने बताया कि पिछली हार ने टीम को और भी मजबूत बनाया।

देशभर में जश्न का माहौल था। सड़कों पर तिरंगे लहराए गए, छोटे कस्बों में भी खुशी का उत्साह देखा गया। सोशल मीडिया पर कई हैशटैग ट्रेंड करने लगे। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, खेल नेता और फिल्मी सितारों ने टीम को बधाई दी।

यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उस संघर्ष की पहचान है जो महिला खिलाड़ियों ने सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बीच सहा। टीम की कप्तानी ने दिखाया कि नेतृत्व सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और समझ भी होता है। युवा खिलाड़ियों ने साबित किया कि भारत के पास अब न केवल एक टीम है, बल्कि प्रेरणा देने वाली टीम है।

इस सफलता ने महिला क्रिकेट को भारत में एक नई पहचान दिलाई है। खेल प्रबंधन अब महिला क्रिकेट को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रायोजन, प्रसारण और समर्थन के क्षेत्र में यह जीत नया अध्याय खोलती है।

वह रात नवी मुंबई की पिच पर केवल क्रिकेट की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और एकता की जीत थी। भारत ने साबित कर दिया कि जब संकल्प अटल हो और टीम एकजुट हो, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। यह जीत आने वाले वर्षों तक भारतीय खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगी।

कब और कौन बना महिला वनडे वर्ल्ड कप का विजेता?
वर्षविजेता टीमउपविजेता टीमजीत का मार्जिन/अंतिम परिणामस्थान
1973इंग्लैंडऑस्ट्रेलियाअंकों के आधार पर जीत
1978ऑस्ट्रेलियाइंग्लैंडअंकों के आधार पर जीत
1982ऑस्ट्रेलियाइंग्लैंड3 विकेट से जीतक्राइस्टचर्च
1988ऑस्ट्रेलियाइंग्लैंड8 विकेट से जीतमेलबर्न
1993इंग्लैंडन्यूजीलैंड67 रन से जीतलॉर्ड्स
1997ऑस्ट्रेलियान्यूजीलैंड5 विकेट से जीतकोलकाता
2000न्यूजीलैंडऑस्ट्रेलिया4 रन से जीतलिंकन, न्यूजीलैंड
2005ऑस्ट्रेलियाभारत98 रन से जीतसुपरस्पोर्ट पार्क, साउथ अफ्रीका
2009इंग्लैंडन्यूजीलैंड4 विकेट से जीतनॉर्थ सिडनी
2013ऑस्ट्रेलियावेस्टइंडीज114 रन से जीतब्रेबॉर्न, मुंबई
2017इंग्लैंडभारत9 रन से जीतलॉर्ड्स
2022ऑस्ट्रेलियाइंग्लैंड71 रन से जीतक्राइस्टचर्च
2025भारतसाउथ अफ्रीका52 रन से जीतनवी मुंबई

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