हर साल 21 नवंबर को हम ‘विश्व टेलीविजन दिवस’ मनाते हैं। आज का दिन सिर्फ टीवी देखने का नहीं, बल्कि उस जादुई डिब्बे को धन्यवाद कहने का है, जिसने हमारे घर में पूरी दुनिया को लाकर रख दिया।एक छोटे से टीवी ने हमें इंसान को चांद पर चलते हुए देखने का मौका दिया।, क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीतते हुए दिखाया , दूर देशों की खबरें दिखाईं, और छोटे-छोटे बच्चों को ‘शक्तिमान’ बनने का सपना दिया। आइए जानते है इस छोटे से डिब्बे ( टेलीविजन ) के बारे मे |

टेलीविजन की शुरुआत किसने और कब की?

टेलीविजन का आविष्कार एक व्यक्ति ने अकेले नहीं किया, बल्कि कई वैज्ञानिकों ने मिलकर इसे बनाया। सबसे बड़ा नाम है स्कॉटलैंड के वैज्ञानिक जॉन लोगी बेयर्ड का। 26 जनवरी 1926 को लंदन में उन्होंने दुनिया का पहला काम करने वाला टेलीविजन दिखाया और चलती-फिरती तस्वीरें प्रसारित कीं। उस समय तस्वीरें बहुत धुंधली थीं और सिर्फ 30 लाइन की थीं, लेकिन यही पहला कदम था। इसके बाद अमेरिका के फिलो फार्न्सवर्थ ने 1927 में पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक टीवी बनाया और जर्मनी के वाल्टर ब्रुच ने 1936 में पहली बार टीवी पर ओलंपिक खेल दिखाए। भारत में टीवी की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में हुई थी – उस दिन सिर्फ एक घंटे का प्रसारण होता था!

टीवी ने हमारी ज़िंदगी  को कैसे बदला?

टीवी ने हमें एक साथ पूरे देश से जोड़ दिया – चाहे इमरजेंसी की घोषणा हो या चंद्रयान की लैंडिंग, सबने एक ही समय पर देखा-सुना। गांव-गांव तक खबरें पहुँच गईं, आज किसान मौसम का हाल टीवी पर देखकर खेती करने जाता है। बच्चों की पढ़ाई में मदद की – ‘हम लोग’, ‘बुनियाद’, ‘मालगुडी डेज़’ जैसे धारावाहिकों ने समाज को आईना दिखाया। खेल प्रेमियों को स्टेडियम घर लाकर दिया – अब IPL से लेकर ओलंपिक तक सब घर बैठे देखते हैं। आपात स्थिति में जान बचाई – चक्रवात, बाढ़ की चेतावनी सबसे पहले टीवी पर आती है। सबसे खूबसूरत बात, परिवार को एक साथ बैठने का बहाना दिया – शाम ढलते ही मम्मी-पापा, दादा-दादी, बच्चे सब टीवी के सामने इकट्ठे हो जाते हैं।

आज भी भारत के लाखों घरों में शाम होते ही पूरा परिवार टीवी के सामने बैठकर हँसता-बोलता है। 

इस विश्व टेलीविजन दिवस पर हम वादा करें कि हम अच्छे और सार्थक कार्यक्रम देखेंगे, बच्चों को कार्टून के साथ-साथ ज्ञानवर्धक चीजें दिखाएंगे और टीवी को सिर्फ समय बिताने का नहीं, बल्कि कुछ नया सीखने का जरिया बनाएंगे।

समय के साथ टीवी का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। जहां कभी यह केवल एंटीना वाला इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स हुआ करता था, वहीं अब यह एक हाई टेक स्मार्ट स्क्रीन बन चुका है। अब टीवी सिर्फ चैनल बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि OTT प्लेटफॉर्म, स्मार्ट टीवी एप्स, यूट्यूब और लाइव स्ट्रीमिंग का केंद्र बन गया है। हाई डेफिनिशन ब्रॉडकास्ट और ऑन डिमांड कंटेंट ने दर्शकों की पसंद को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। आज टीवी शिक्षा, योग, फिटनेस क्लासेस, डिजिटल क्लासरूम और यहां तक कि ऑनलाइन पूजा तक का भी माध्यम बन चुका है। लगातार तकनीक के साथ खुद को ढालते हुए टीवी की लोकप्रियता कम होने के बजाय समय के साथ और बढ़ती जा रही है।

भविष्य में टेलीविजन और अधिक उन्नत रूप लेगा। AI आधारित तकनीक दर्शक की पसंद को समझकर उसे personalised recommendations देगी, जबकि VR और AR के अनुभव स्क्रीन को और अधिक immersive बना देंगे। टीवी और मोबाइल का मेल एक हाइब्रिड मीडिया तैयार कर रहा है, जहां दोनों एक दूसरे के पूरक बनते जा रहे हैं। आने वाले समय का टीवी केवल देखने का साधन नहीं रहेगा, बल्कि इंटरएक्टिव और स्मार्ट घरेलू साथी जैसा रूप ले लेगा।

विश्व टेलीविजन दिवस हमें यह याद दिलाता है कि टीवी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। इसने दुनिया को समझने, समाज को देखने और जानकारी पाने के हमारे तरीकों को बदल दिया है। तकनीक चाहे जितनी भी आगे बढ़ जाए, टेलीविजन का महत्व हमेशा बना रहेगा क्योंकि यह सिर्फ एक स्क्रीन नहीं, बल्कि दुनिया से जुड़ने की एक खिड़की है।

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