क्या आप भी डाइट कोक पीते हैं? तो शायद आपने भी नोटिस किया होगा कि पिछले कुछ हफ्तों से डाइट कोक की कैन पहले से महंगी मिल रही है। अगर हां, तो आपका शक बिल्कुल सही है और इसकी वजह भारत की सीमाओं से हजारों किलोमीटर दूर छिपी है। चलिए जानते हैं इसके पीछे का पूरा सच।
इसकी असली वजह है मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष। अब आप सोचेंगे कि मिडिल ईस्ट के युद्ध से भारत में कोक के महंगे होने का क्या लेना-देना? लेना-देना है, क्योंकि जिस समुद्री रास्ते से एल्युमीनियम कैन और कच्चा माल भारत तक पहुंचता है, वह रास्ता ही बुरी तरह प्रभावित हो गया है। यह रास्ता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और अहम शिपिंग मार्गों में से एक है। ईरान से जुड़े संघर्ष में हुए एक अस्थायी समझौते के टूटने के बाद इस रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह बाधित हो गई है, और आशंका है कि इसका असर दूसरे अहम समुद्री मार्गों तक भी फैल सकता है।
भारत खुद एल्युमीनियम का बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन कैन बनाने के लिए जिस खास तरह की एल्युमीनियम शीट की जरूरत होती है, उसका एक बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है। यही वजह है कि सप्लाई चेन में आई इस रुकावट का सीधा असर भारत में कैन की उपलब्धता पर पड़ा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोका-कोला अब साउथईस्ट एशिया से बड़े साइज के एल्युमीनियम कैन मंगवाने पर मजबूर हो गई है, क्योंकि नियमित सप्लाई अब भी प्रभावित है।
अब बात करते हैं असली नंबरों की, जो इस पूरी कहानी को समझने के लिए सबसे जरूरी हैं। पहले भारत में डाइट कोक का कैन करीब 300 मिलीलीटर का आता था, जिसकी कीमत 40 रुपये होती थी। लेकिन अब इसकी जगह 330 मिलीलीटर का कैन मिल रहा है, जिसकी कीमत बढ़कर 50 रुपये हो गई है।
यहीं पर एक बात है जिस पर गौर करना जरूरी है। ऊपर से देखने पर लगता है कि सिर्फ 10 रुपये बढ़े हैं, और बदले में कंपनी ज्यादा मात्रा भी दे रही है तो शायद घाटे का सौदा नहीं है। लेकिन असल कहानी इसमें छिपी हुई है। अगर आप प्रति मिलीलीटर कीमत निकालें, तो यह बढ़ोतरी करीब 13.6 प्रतिशत बैठती है। यानी कैन का साइज बढ़ाकर कंपनी ने असल कीमत वृद्धि को थोड़ा छुपा दिया है यह एक ऐसा तरीका है जो ग्राहक को तुरंत नजर नहीं आता, जब तक वह खुद हिसाब न लगाए।
दिलचस्प बात यह भी है कि कंपनी ने अभी तक इस कीमत बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। साथ ही, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक कोका-कोला के कुछ भारतीय बॉटलिंग पार्टनर्स ने सीमित समय के लिए 200 मिलीलीटर की कांच की बोतल में भी डाइट कोक बेचना शुरू किया है, लेकिन यह विकल्प कैन से भी महंगा है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर सिर्फ डाइट कोक ही इस समस्या की चपेट में क्यों आया, जबकि बाकी सॉफ्ट ड्रिंक्स की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं दिखा? इसका जवाब पैकेजिंग में छिपा है। भारत में डाइट कोक सिर्फ एल्युमीनियम कैन में ही बिकता है, प्लास्टिक बोतल में नहीं जबकि दुनिया के कई और देशों में यह अलग-अलग पैकेजिंग में उपलब्ध है। इसके उलट, कोक जीरो प्लास्टिक बोतल और कैन, दोनों फॉर्मेट में मिलता है, इसलिए उसकी सप्लाई पर इतना असर नहीं पड़ा। यही वजह है कि सिर्फ कैन में मिलने वाले डाइट कोक की कीमत बढ़ी है, जबकि प्लास्टिक बोतल वाले बाकी ड्रिंक्स के दाम पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
एक और वजह भी इस कहानी में जुड़ती है। हाल ही में जीएसटी काउंसिल ने कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पर टैक्स की दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी है। यानी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन की दिक्कत ही नहीं, बल्कि घरेलू टैक्स नीति में हुआ बदलाव भी कार्बोनेटेड ड्रिंक्स को महंगा बनाने में भूमिका निभा रहा है।
यह पूरा मामला दिखाता है कि दुनिया के एक कोने में चल रहा संघर्ष कैसे हजारों किलोमीटर दूर आपकी जेब पर सीधा असर डाल सकता है। एक वैश्विक शिपिंग रूट में आई रुकावट, भारत के बाजार में एक साधारण से सॉफ्ट ड्रिंक की कीमत तक बदल देती है यही ग्लोबल सप्लाई चेन की असली ताकत और कमजोरी दोनों है।
तो अगली बार जब आप किसी दुकान पर डाइट कोक खरीदने जाएं, तो सिर्फ कीमत देखकर पैसे मत दीजिए। कैन पर लिखी मात्रा यानी मिलीलीटर जरूर ध्यान से देखिए, क्योंकि असली कीमत वहीं छिपी होती है।
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