कराधान, लेखांकन, कानून और संबंधित पेशेवर क्षेत्रों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाली अग्रणी संस्था द चैंबर ऑफ टैक्स कंसल्टेंट्स (सीटीसी) ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘शताब्दी मंथन’ कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ पेशेवरों को मानद सदस्यता प्रदान कर सम्मानित किया। यह आयोजन संस्था के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समापन समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
सीटीसी ने इस अवसर पर उन व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जिन्होंने कानून, कराधान और संवैधानिक व्यवस्था के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देकर देश की पेशेवर और न्यायिक प्रणाली को नई दिशा दी है। मानद सदस्यता प्राप्त करने वालों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश और प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ जस्टिस आर.वी. ईश्वर, वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ सोपारकर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता पर्सी पारदीवाला शामिल रहे। वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार यात्रा पर होने के कारण समारोह में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके और उन्होंने यह सम्मान वर्चुअल माध्यम से स्वीकार किया।
कार्यक्रम के दौरान इन सभी विधि विशेषज्ञों के दशकों लंबे योगदान को याद किया गया। कानून, संवैधानिक विषयों, कराधान और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े उनके कार्यों ने देश के कानूनी परिदृश्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वक्ताओं ने कहा कि इन पेशेवरों ने केवल न्यायिक और कानूनी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल नहीं की, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने हैं।
‘द न्यू टैक्स कोड’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र के मॉडरेटर और सीए अनीश ठाकर ने कहा कि शताब्दी मंथन केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि यह उन मूल्यों और सिद्धांतों पर विचार करने का अवसर भी था जिन्होंने पिछले सौ वर्षों में इस पेशे को दिशा दी है। उनके अनुसार, कानूनी और पेशेवर क्षेत्र के दिग्गजों को एक मंच पर लाने से सार्थक चर्चा और ज्ञान साझा करने का अवसर मिला, जो युवा पेशेवरों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा।
इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता रफीक दादा और पूर्व प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त मालती श्रीधरन सहित कई अनुभवी विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कर सुधारों और नए टैक्स कोड से जुड़ी चुनौतियों तथा अवसरों पर चर्चा करते हुए कई व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों का मानना था कि बदलते आर्थिक और कानूनी परिवेश में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी दक्षता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में शामिल कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और सीए नीलेश शाह ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति का आधार ऐसे संस्थान और पेशेवर होंगे जो भरोसे, नैतिकता और दीर्घकालिक सोच को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने कहा कि सीटीसी जैसे संगठन, जो पिछले एक शताब्दी से ज्ञान और पेशेवर उत्कृष्टता को बढ़ावा दे रहे हैं, भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
‘शताब्दी मंथन’ सीटीसी की शताब्दी पहल का प्रमुख हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पिछले सौ वर्षों की उपलब्धियों और अनुभवों को संजोते हुए भविष्य की दिशा तय करना है। यह आयोजन संस्था की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है जिसके तहत वह कराधान और कानूनी क्षेत्र में उत्कृष्टता, विचार नेतृत्व और सार्थक योगदान को निरंतर प्रोत्साहित करती रही है।
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