अगर आपसे पूछा जाए कि क्या आप एक ऐसे घर में रहना चाहेंगे जहां एक रात रुकने के बदले आपको लगभग 52,000 रुपये दिए जाएंगे, तो आपका जवाब क्या होगा?
सुनने में यह किसी गेम शो का टास्क लगता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। जापान में यह सच में हो रहा है, और इसके पीछे की वजह उतनी डरावनी नहीं जितनी सुनने में लगती है।
दरअसल जापान में एक कानून है। अगर कोई व्यक्ति कोई घर या प्रॉपर्टी खरीदना या किराए पर लेना चाहता है, तो एजेंट को उसे उस प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी देनी पड़ती है। अब आप सोचेंगे कि यह तो हर जगह होता है, फिर इसमें नया क्या है।
नया यह है कि अगर उस घर में पहले कभी कोई हादसा हुआ हो, जैसे मर्डर, सुसाइड, आग से मौत, या फिर कोई बुजुर्ग व्यक्ति घर में अकेला मर गया हो और उसकी बॉडी हफ्तों बाद मिली हो, तो मकान मालिक को यह बात सबसे पहले क्लाइंट को बतानी पड़ती है। जापान में ऐसे घरों को “जिको बुक्केन” कहा जाता है।
यह जानकारी मिलते ही ज्यादातर लोग वह घर लेने से मना कर देते हैं। जाहिर सी बात है, अगर हमें या आपको पता चले कि जिस घर में हम रहने वाले हैं वहां पहले कोई ऐसी घटना हुई है, तो हम भी दस बार सोचेंगे। यही हाल जापान में भी है, और इसी वजह से ऐसे हजारों घर खाली पड़े रहते हैं।
यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है। यह स्कीम जापान की सरकार नहीं चला रही। पैसे देने वाली सरकार नहीं, बल्कि प्राइवेट रियल एस्टेट कंपनियां हैं, जो मकान मालिकों की मदद के लिए यह सर्विस शुरू करती हैं। सरकार की भूमिका सिर्फ इतनी है कि उसने वह कानून बनाया है जिसके तहत घर की पुरानी घटना बतानी अनिवार्य है। बाकी पूरा आइडिया, यानी रात भर घर में रुकने के लिए पैसे देना, यह प्राइवेट कंपनियों का बिजनेस मॉडल है।
इस दिक्कत से निकलने का रास्ता इन कंपनियों ने निकाला है। वे किसी भी व्यक्ति को पूरी रात उस घर में अकेले रुकने के लिए कहती हैं, और इसके बदले करीब 88,000 येन, यानी लगभग 52,000 रुपये देती हैं। यह व्यक्ति अपने साथ थर्मल कैमरा और ईएमएफ मीटर जैसे उपकरण लेकर जाता है, ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि को रिकॉर्ड किया जा सके।
अगली सुबह वह बताता है कि रात में कुछ अजीब हुआ या नहीं। ज्यादातर मामलों में जवाब होता है नहीं। इसके बाद कंपनी एक रिपोर्ट तैयार करती है, जो मकान मालिक अगले खरीदार या किराएदार को दिखा सकता है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ता है और घर बिकने या किराए पर जाने की संभावना बढ़ जाती है।
अब सवाल यह है कि इतना अजीब तरीका अपनाने की जरूरत ही क्यों पड़ी। यहीं से असली कहानी शुरू होती है, और यह कहानी भूत-प्रेत की नहीं, बल्कि पैसों की है।
जापान में, खासकर टोक्यो जैसे बड़े शहरों में घरों के दाम पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं। साथ ही जापान की आबादी लगातार बूढ़ी होती जा रही है, जिसकी वजह से बुजुर्गों की अकेली मौत, यानी “कोदोकुशी” के मामले भी बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि जिको बुक्केन घरों की संख्या भी बढ़ रही है, ठीक उसी समय जब सामान्य घर खरीदना पहले से मुश्किल होता जा रहा है।
यहीं पर युवा खरीदारों की सोच बदल रही है। अब कई युवा जापानी लोग जानबूझकर ऐसे जिको बुक्केन घर खरीद रहे हैं, क्योंकि यह सामान्य घरों के मुकाबले काफी सस्ते मिलते हैं, कई मामलों में करीब 20 से 50 प्रतिशत तक कम कीमत पर। जिन लोगों के लिए किसी पुरानी घटना से ज्यादा जरूरी अपने बजट में एक छत हासिल करना है, उनके लिए यह सौदा घाटे का नहीं लगता।
यानी असल में यह पूरा सिस्टम, चाहे वह ओवरनाइट इन्वेस्टिगेटर की नौकरी हो या फिर घर सस्ते में बिकना, जापान के बढ़ते हुए हाउसिंग संकट का नतीजा है। भूत का डर तो बस एक बहाना बन गया है, असली मामला यह है कि सामान्य घर अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।
इस पूरी कहानी को पढ़ने के बाद एक बात साफ हो जाती है। लोग इस खबर पर इसलिए रुकते हैं क्योंकि इसमें भूत-प्रेत का जिक्र है, लेकिन असल में यह कहानी उस चीज के बारे में है जो शायद भूत से भी ज्यादा डरावनी है, यानी बढ़ता हुआ किराया और घर का बजट।
भारत में भी ऐसी सोच नई नहीं है। यहां भी कई घरों को “मनहूस” या “कंडम” मानकर लोग उनसे दूरी बना लेते हैं, लेकिन भारत में जापान जैसा कोई कानून नहीं है जो मकान मालिक को ऐसी घटना बताना अनिवार्य बनाए। फर्क सिर्फ इतना है कि जापान में इस डर को एक बिजनेस मॉडल में बदल दिया गया है, जो आखिरकार घर को सस्ता और सुलभ बना रहा है।
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