केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत अब सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में इस राष्ट्रीय गीत के सभी छह अंतरे गाए जाना अनिवार्य होगा। अब तक औपचारिक अवसरों पर प्रायः केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे, जिन्हें आधिकारिक मान्यता प्राप्त है। हालांकि मूल रचना छह अंतरों की है, और सरकार का कहना है कि गीत के पूर्ण स्वरूप को सम्मान देना राष्ट्रीय चेतना के अनुरूप कदम है।

जारी निर्देशों के अनुसार केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सभी अंतरे राष्ट्रीय गान से पहले प्रस्तुत किए जाएंगे। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की संवैधानिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत है और उसकी गरिमा अलग है, जबकि राष्ट्रीय गान का संवैधानिक महत्व अलग है।

दिशानिर्देशों में शैक्षणिक संस्थानों को विशेष रूप से शामिल किया गया है। स्कूलों और कॉलेजों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने औपचारिक कार्यक्रमों में गीत के सभी अंतरे शामिल करें और विद्यार्थियों को इसके ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराएं। सरकार का मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की भूमिका को समझना नई पीढ़ी के लिए आवश्यक है।

‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्नीसवीं सदी में की थी। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय भावना का प्रमुख प्रतीक बन गया था। अनेक जनसभाओं और आंदोलनों में इसे एकजुटता और स्वाभिमान के स्वर के रूप में गाया गया। यही ऐतिहासिक संदर्भ सरकार के इस निर्णय की पृष्ठभूमि में बताया जा रहा है।

हालांकि, देशभर में इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता होगी। विशेष रूप से राज्यों के शिक्षा विभागों को स्पष्ट कार्ययोजना बनानी होगी ताकि शैक्षणिक गतिविधियों के साथ तालमेल बना रहे। फिलहाल यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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